सरकार के स्तर से नहीं मिली कोई सहायता, आंदोलनकारियों में आक्रोश
Jamshedpur News :
झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के पूर्व महासचिव बुधराम सोय गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं. 1990 के दशक में झारखंड अलग राज्य आंदोलन में उन्होंने कई बार जेल की यातनाएं सही और आर्थिक नाकेबंदी का नेतृत्व किया. हाल ही में उन्हें पैरालिसिस अटैक हुआ, लेकिन अब तक सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली. वे खरसावां प्रखंड के दलाईकेला पंचायत के बोनईकेला गांव टोला जोजोसाई में रहकर देसी जड़ी-बुटी से इलाज करवा रहे हैं. इस उपेक्षा पर झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा और अन्य कार्यकर्ताओं ने आक्रोश जताया है.क्या कहते हैं झारखंड आंदोलनकारी डेमका सोय व हरमोहन महतो
झारखंड आंदोलनकारी नेता डेमका सोय व हरमोहन महतो ने कहा कि झारखंड अलग राज्य आंदोलन के दौरान बुधराम सोय को कई बार जेल की यातनाएं सहनी पड़ी, उनका घर कुर्क हुआ, लेकिन वे अपने लक्ष्य से कभी नहीं डिगे. लेकिन वर्तमान समय में आर्थिक तंगी की वजह से पैरालिसिस का इजाल कराने में असमर्थ हैं. एक से डेढ़ साल पूर्व इलाज के अभाव में बिरसानगर निवासी झारखंड आंदोलनकारी देवाशीष नायक का देहांत हो गया. इसी तरह कई आंदोलनकारियों की इलाज के अभाव में असमय मृत्यु हो रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद आंदोलनकारी के सुपुत्र हैं. उन्हें आंदोलनकारियों की इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए और अविलंब बुधराम सोय को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना चाहिए. उनका रिम्स या किसी बड़े अस्पताल में अविलंब इलाज कराया जाये. उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों को किसी तरह की बीमारी की स्थिति में तत्काल 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाये.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
