Jamshedpur: जिले के सरकारी स्वास्थ्य महकमे से एक तरफ राहत तो दूसरी तरफ घोर लापरवाही की तस्वीर सामने आ रही है. ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा तंत्र मजबूत करने के लिए जहां पांच ब्लॉकों में पब्लिक हेल्थ यूनिट की स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. वहीं शहरी क्षेत्र में सदर अस्पताल परिसर में बन रहा अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी दो साल बाद भी अधर में लटका है.
1.42 करोड़ की है योजना, शुरू नहीं हुआ निर्माण कार्य
सदर अस्पताल परिसर में वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम के तहत 1.42 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड लैब की आधारशिला रखी गयी थी. इसका निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है. इसके खुलने से टीबी, मलेरिया, एड्स और पैथोलॉजी समेत संचारी व गैर-संचारी रोगों की मुफ्त जांच की सुविधा एक ही छत के नीचे मिलती. लेकिन प्रशासनिक सुस्ती से अब तक गरीब मरीजों को इसका फायदा नहीं मिल पाया.
इन पांच प्रखंडों में खुलेंगे पब्लिक हेल्थ यूनिट
दूसरी ओर, सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को बड़ी राहत देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के पांच प्रखंडों-घाटशिला, चाकुलिया, बहरागोड़ा, हल्दीपोखर और पोटका में ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट खोलने की कवायद तेज कर दी है. इसके खुलने से ग्रामीणों को मलेरिया, टाइफाइड और पीलिया जैसी जांचों के लिए एमजीएम या सदर अस्पताल नहीं भागना पड़ेगा.
मैनपावर तैनात, ट्रेनिंग भी पूरी
जिला महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. असद ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण के उद्देश्य से शुरू हो रही इस योजना के लिए विभाग द्वारा पब्लिक हेल्थ परामर्शदाता (कंसलटेंट), लैब टेक्नीशियन और डाटा एंट्री ऑपरेटरों की नियुक्ति कर दी गयी है. जिला सर्विलेंस विभाग में सभी परामर्शदाताओं को विशेष ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है. उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर तुरंत जांच होने से गांवों में किसी भी बीमारी को महामारी बनने से पहले रोका जा सकेगा.
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