शहर में बनेंगे मिसाइलों के मेटल कंपोनेंट, स्टील-एल्युमिनियम की प्रोसेसिंग पर चल रहा काम, पढें पूरी खबर...

आदित्यपुर अब सिर्फ ऑटोमोबाइल हब नहीं रहेगा. जल्द ही यहां पिनाका और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के लिए जरूरी मेटल कंपोनेंट्स और केसिंग तैयार होंगे. सीएसआइआर-एनएमएल तकनीक विकसित करेगा, जिससे रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी.

जमशेदपुर : आदित्यपुर की औद्योगिक पहचान अब ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग कंपोनेंट तक सीमित नहीं रहने वाली है. आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में जल्द ही पिनाका और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के लिए जरूरी स्टील-एल्युमिनियम के छोटे-छोटे इक्विपमेंट और केसिंग तैयार होने लगेंगे. सीएसआइआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधुरी ने प्रभात खबर से विशेष बातचीत में यह जानकारी दी.

डिफेंस सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है एनएमएल

उन्होंने बताया कि एनएमएल डिफेंस सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और स्थानीय एमएसएमई और कंपनियों के साथ मिलकर तकनीक विकसित कर रहा है. डॉ. चौधुरी ने कहा - टंगस्टन जैसे महत्वपूर्ण तत्व भारत के अयस्कों में नहीं मिलते. एनएमएल ने स्क्रैप से टंगस्टन निकालने की तकनीक विकसित की, जो डीआरडीओ का स्पॉन्सर्ड प्रोजेक्ट था. यह तकनीक दो (कुछ रिपोर्टों में तीन) निजी उद्योगों को ट्रांसफर कर दी गयी है. अब ये कंपनियां डीआरडीओ को टंगस्टन सप्लाई कर रही हैं, जिससे मिसाइल और अन्य रक्षा उपकरणों का निर्माण हो रहा है.

स्टील मिलने के बाद भी तरह की प्रोसेसिंग की जरूरत : डॉ चौधुरी

आदित्यपुर पर खास फोकस करते हुए निदेशक डॉ चौधुरी ने बताया - जमशेदपुर और आदित्यपुर की कई कंपनियां इन कामों में दिलचस्पी दिखा रही हैं. जिंदल स्टेनलेस सहित आदित्यपुर स्थित एक कंपनी के साथ चर्चा के दौरान पता चला कि मिसाइलों की केसिंग और अन्य छोटे इक्विपमेंट के लिए सिर्फ एक्सट्रैक्शन ही काफी नहीं. स्टील मिलने के बाद कई तरह की प्रोसेसिंग की जरूरत होती है. एनएमएल लैब स्केल पर ये तकनीकें विकसित करेगा, फिर कंपनियां अपने प्लांट में बड़े पैमाने पर उत्पादन करेंगी. एनएमएल टेक्निकल साझेदार के रूप में काम करेगा. डॉ. चौधुरी ने जोर दिया कि एमएसएमइ और स्थानीय उद्योग प्रौद्योगिकी आउटरीच के केंद्र में हैं. आदित्यपुर की कंपनियां उत्पादन चुनौतियों को इनोवेशन से हल करने में एनएमएल के साथ करीब से काम कर रही हैं. इससे न सिर्फ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.

किस तरह से टेक्निकल सपोर्ट करेगा सीएसआइआर-एनएमएल

रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले धातु उत्पादों की जरूरत सामान्य औद्योगिक उत्पादों से अलग होती है. केवल स्टील तैयार कर देना पर्याप्त नहीं है. उसकी रासायनिक संरचना, माइक्रोस्ट्रक्चर, मजबूती, कठोरता, ताप सहने की क्षमता और मशीनिंग व्यवहार तक को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखना पड़ता है. मिसाइल प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाली केसिंग और दूसरे संरचनात्मक हिस्सों में स्टील, एल्युमिनियम और अन्य मिश्रधातुओं के विभिन्न कंपोनेंट इस्तेमाल होते हैं. इनका निर्माण और फिनिशिंग अत्यधिक सटीकता के साथ करनी होती है. एनएमएल इसी स्तर की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने में उद्योगों की मदद करेगा.

टंगस्टन में पहले ही तैयार कर चुका है तकनीक

रक्षा क्षेत्र में एनएमएल के काम का एक महत्वपूर्ण उदाहरण टंगस्टन की स्क्रैप से रिकवरी है. एनएमएल ने भारी टंगस्टन एलॉय स्क्रैप और इस्तेमाल हो चुके टंगस्टन कार्बाइड टूल्स से उच्च शुद्धता वाला येलो टंगस्टन ऑक्साइड और टंगस्टन मेटल पाउडर तैयार करने की प्रक्रिया विकसित की है. संस्थान के अनुसार इस प्रक्रिया से 99.9 प्रतिशत से अधिक शुद्धता के उत्पाद और 95 प्रतिशत से अधिक रिकवरी हासिल की जा सकती है. यह तकनीक व्यावसायिक संस्थाओं को ट्रांसफर भी की जा चुकी है.

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By Sandeep kumar

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