Jamshedpur news. 1965 एवं 1971 के युद्धवीर रहे पूर्व सैनिक हीरा लाल सिंह पंचतत्व में विलीन

बर्मामाइंस से निकली अंतिम यात्रा, भुइयांडीह सुवर्णरेखा बर्निंग घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

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1965 और 1971 के युद्ध में भारतीय फौज का हिस्सा रहे भारतीय थल सेना से सेवानिवृत्त एसपीआर हीरा लाल सिंह का निधन हो गया. 1965 में सेना में भर्ती होने के साथ ही उन्हें प्रशिक्षण काल में ही युद्ध के मैदान में जाने का सौभाग्य हासिल हुआ. हीरा लाल सिंह 1973 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद जमशेदपुर स्थित टीआरएफ कंपनी में सेवा दी. वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद बर्मामाइंस स्थित प्रेमनगर में अपने दो पुत्र दीपेश एवं रूपेश बेटी सोनी के साथ रहते थे. उनके निधन की जानकारी मिलने पर पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सुशील कुमार सिंह, दिनेश सिंह समेत अन्य काफी साथी को उनके आवास पर पहुंचे. सैनिक वीर को पूर्व सैनिक सेवा परिषद के प्रतिनिधियों ने तिरंगा ध्वज सम्मान प्रदान किया. उनके पार्थिव शरीर को लक्ष्मीनगर स्थित वरिष्ठ नागरिक भवन लाया गया, जहां उन्हें नागरिकों ने अंतिम विदाई दी.

बर्मामाइंस, गोलमुरी, सीतारामडेरा थाना की पीसीआर वैन ने सैनिक वीर के अंतिम यात्रा की अगुवाई की. भुइयांडीह सुवर्णरेखा घाट में सेना की तरफ से कमांडिंग ऑफिसर कर्नल मानस कुंडू के प्रतिनिधि के रूप में नायब सूबेदार बलवीर सिंह ने पुष्प चक्र चढ़ाया, जबकि राज्य सैनिक निदेशक ब्रिगेडियर निरंजन कुमार एवं कोल्हान सैनिक कल्याण पदाधिकारी कर्नल किशोर सिंह के प्रतिनिधि के रूप में पूर्व सैनिक सुशील कुमार सिंह ने पुष्प चक्र चढ़ाया. अंतिम यात्रा में हवलदार सतेंद्र सिंह, बरमेश्वर पांडे, बलजीत सिंह, राधेश्याम सिंह, विजय शंकर पांडे, उपेंद्र सिंह, अशोक श्रीवास्तव, सतनाम सिंह, अजय कुमार सिंह, शत्रुघ्न प्रसाद सिंह, संजय सिंह, पप्पू सिंह, पवन सिंह ने भी संयुक्त रूप से पुष्प चक्र चढ़ाया. बड़े पुत्र दीपेश ने दी पिता हीरा लाल सिंह को मुखाग्नि दी.

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By PRADIP CHANDRA KESHAV

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