वरीय संवाददाता, जमशेदपुर
इंकैब इंडस्ट्रीज (केबल कंपनी) के अधिग्रहण को लेकर बुधवार को गोलमुरी में स्थिति तनावपूर्ण हो गयी. कंपनी के कर्मचारियों का 26 वर्षों का आक्रोश अचानक विरोध में बदल गया. दोपहर करीब एक बजे राहुल सिंह तोमर, पप्पू यादव, राधे साह और अमित कुमार के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में कर्मचारियों और उनके आश्रितों ने कंपनी के मुख्य गेट पर धावा बोल दिया.
आक्रोशित भीड़ ने वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों को खदेड़-खदेड़कर पीटना शुरू कर दिया. जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने मुख्य गेट को पूरी तरह बंद कर दिया और लगभग तीन घंटे तक जोरदार हंगामा किया. मामला बिगड़ता देख पहले गोलमुरी पुलिस और फिर सिटी डीएसपी संजीव कुमार मौके पर पहुंचे. काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया.
इन दो वजहों से भड़का गुस्सा
दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब मंगलवार शाम को बिना किसी पूर्व सूचना या आपसी सहमति के कर्मचारियों के बैंक खातों में अचानक क्लेम (दावे) की राशि भेज दी गयी. रही-सही कसर बुधवार को तब पूरी हो गयी. जब केबुल टाउन परिसर में केबुल कर्मी अजय कुमार का अस्थायी कार गैरेज (शेड) तोड़ दिया गया. इन दोनों घटनाओं से कर्मचारी और उनके परिजन भड़क गये.
क्यों उपजा है यह विवाद ?
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की कोलकाता बेंच द्वारा वेदांता लिमिटेड के रेजोल्यूशन प्लान को अंतिम मंजूरी दिये जाने के बाद पहले एक रुपये और मंगलवार को कर्मचारियों के बैंक खातों में सीधे राशि भेजने की कवायद शुरू कर दी गयी है. कई प्रभावित कर्मचारियों के खातों में क्लेम (बकाया राशि) के पैसे भेजी गयी. कर्मचारियों को बिना किसी सूचना और क्लेम की राशि कम भेजी गयी. इसी अधिग्रहण और सेटलमेंट की प्रक्रिया का कर्मचारी विरोध कर रहे हैं.
