वाट्सएप से संपर्क में थे विक्रम-अखिलेश

पुलिस पूछताछ में विक्रम शर्मा ने उगले कई राज... जमशेदपुर : पिछले दस वर्ष से फरार अखिलेश का गुरु विक्रम शर्मा और सजायाफ्ता अखिलेश दोनों एक दूसरे से वाट्सएप पर ज्यादा काॅन्टेक्ट रखते थे. अखिलेश की तलाश में जिला पुलिस की टीम ने जबलपुर में छापेमारी की तो अखिलेश वहां से फरार हो गया. अखिलेश […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 19, 2017 4:08 AM

पुलिस पूछताछ में विक्रम शर्मा ने उगले कई राज

जमशेदपुर : पिछले दस वर्ष से फरार अखिलेश का गुरु विक्रम शर्मा और सजायाफ्ता अखिलेश दोनों एक दूसरे से वाट्सएप पर ज्यादा काॅन्टेक्ट रखते थे. अखिलेश की तलाश में जिला पुलिस की टीम ने जबलपुर में छापेमारी की तो अखिलेश वहां से फरार हो गया. अखिलेश ने विक्रम शर्मा को देहरादून से फोन कर नोएडा बुलाया. नोएडा में अखिलेश सिंह ने विक्रम शर्मा का पुराना फोन ले लिया और नया एंडरॉयड फोन दिया. उसी दिन से दोनों एक दूसरे से वाट्सएप पर काॅन्टेक्ट बनाये हुए थे. बिष्टुपुर थाना में विक्रम शर्मा ने आठ घंटे तक चली लंबी पूछताछ में यह खुलासा किया है. विक्रम के मोबाइल से पुलिस को और भी राज खुलने की उम्मीद है.
नेट से इ-पेपर में अखबारों को पढ़ता था विक्रम : विक्रम ने पुलिस को बताया कि फरारी के दौरान भी उसने अखिलेश सिंह के अापराधिक गतिविधियों पर नजर रखी थी. शहर में कौन अापराधिक गिरोह काम कर रहा है. अखिलेश की किस मामले में क्या भूमिका है, इन सब बातों की जानकारी वह अखबार पढ़कर लेता था. देहरादून में वह नेट के इ पेपर के जरिए शहर के चर्चित अखबारों को पढ़ता था. अपराध जगत में अखिलेश को आगे ले जाने के लिए कभी-कभी अापराधिक गाइड लाइन भी देता था.
स्क्रैप वालों से रंगदारी वसूलने की सलाह भी उसने अखिलेश सिंह को दी थी. विक्रम शर्मा को उपेंद्र सिंह और अमित राय हत्याकांड की पूरी जानकारी अखिलेश ने वाट्सएप पर दी थी.
अखिलेश सिंह को शाकाहारी बना डाला : विक्रम ने पुलिस को बताया है कि फरारी के दौरान अखिलेश सिंह ने एक बड़ी धार्मिक संस्था के साथ विक्रम ने जोड़ा और अखिलेश सिंह को राधा स्वामी का सदस्य बना दिया. अखिलेश ने फरारी के दौरान मांस-मुर्गा खाना छोड़ दिया. देशभर में संस्था द्वारा आयोजित होने वाले बड़े समागम में अखिलेश और विक्रम शर्मा दोनों भाग लेते थे.
नोएडा में जेपी ग्रीन में अखिलेश और विक्रम पार्टनर है : पुलिस सूत्रों के मुताबिक अखिलेश जब पहली बार शहर से हाजत से फरार हुआ था तो उसने नोएडा में जाकर शरण ली थी. अखिलेश और विक्रम शर्मा का नोएडा में जेपी ग्रीन में पार्टनरशिप है. दोनों का करोड़ांे रुपये इन्वेस्ट किये हैं.
विक्रम नेट पर जमशेदपुर संस्करण के सभी अखबारों को पढ़कर अापराधिक जानकारियां रखता था
साला की शादी में विक्रम और अखिलेश ने एक जैसा पहना था लिबास : पुलिस को जब्त दस्तावेज में एक तस्वीर हाथ लगी है जो विक्रम शर्मा और अखिलेश सिंह के एक शादी समारोह में शामिल होने की है. जांच में पुलिस को पता चला है कि विक्रम शर्मा के साला की शादी में अखिलेश सिंह और विक्रम शर्मा ने एक जैसा लिवास पहना था.
जयराम सिंह हत्याकांड में जेल जायेगा विक्रम : देहरादून से तीन दिनों के ट्राजिंट रिमांड पर विक्रम शर्मा को शहर लेकर पहुंची जिला पुलिस की टीम बुधवार को सुबह उसे जेल भेजेगी. बिष्टुपुर बाग-ए-जमेशदपुर गोलचक्कर के पास टाटा स्टील के सुरक्षाधिकारी जयराम सिंह हत्याकांड में जेल भेजेगी.
विक्रम शर्मा ने भी कई नामाें से बना रखी है आइडी : पुलिस को पूछताछ में विक्रम ने बताया कि उसने देहरादून में कई नाम से आइडी बना रखी है. उसने आदित्य शर्मा, विक्रामादित्य शर्मा, वीके रणीवाल और कुछ नाम से पहचान पत्र बना रखा है, लेकिन राजपुर के ग्रीन वैली में वह विक्रम शर्मा के नाम से रहता था. कुछ आइडी विक्रम शर्मा ने काशीपुर से भी बनवा रखी है.
अखिलेश ने ग्वालियर, चंड़ीगढ और आगरा में भी खरीदा है फ्लैट
विक्रम शर्मा ने पूछताछ में बताया है िक अखिलेश सिंह ने पंजाब के चंडीगढ़, ग्वालियर और आगरा में भी फ्लैट खरीद रखा है. तीनों जगहों पर फरजी आइडी के माध्यम से अखिलेश ने चंडीगढ़ व आगरा में रियल स्टेट के बिजनेस में पूंजी फंसायी है. अखिलेश सिंह ने अपने ससुर चंदन सिंह के जरिये करोड़ों का निवेश किया है.
चंदन सिंह का बनारस की कई कंपनियों जिसमें चंदन सिंह, उनका बेटा विकास डायरेक्टर है, सभी में अखिलेश सिंह का पैसा लगा है. विक्रम से बिष्टुपुर थाना में एसएसपी अनूप टी मैथ्यू, सिटी एसपी प्रशांत आनंद, डीएसपी सुधीर कुमार, एटीएस की टीम ने पूछताछ की. शुरुआत में विक्रम पुलिस को कुछ बताने को तैयार नहीं था, लेकिन बाद में धीरे-धीरे उसने पुलिस के सामने परत दर परत अखिलेश सिंह के बारे में जानकारी देनी शुरू की.
एटीएस के एसपी व सीआइडी ने भी की पूछताछ
विक्रम शर्मा ने एटीएस के एसपी अजीत डुंगडुंग तथा सीआइडी की टीम ने भी विक्रम शर्मा से पूछताछ की. शुरुआत में विक्रम पुलिस वालों की अखबार में पढ़ी खबरों को बताकर उनकी प्रशंसा करने में लगा रहा. पुलिस जब भी अखिलेश और शहर में आशीष डे हत्याकांड, जयराम सिंह हत्याकांड समेत अन्य अपराधों की जानकारी हासिल करने लगती तो विक्रम शर्मा पुलिस को गुमराह करने के लिए अधिकारियों की प्रशंसा करने में जुटा रहता.