आ गये विदेशी मेहमान ! :::: असंपादित 2
आ गये विदेशी मेहमान ! :::: असंपादित 2हर साल आने वाले मेहमानों का शहर में पादार्पण हो चुका है. ये ऐसे मेहमान हैं जो दूर देश से शहर में आते हैं. कुछ महीने रहने के बाद वापस अपने देश लौट जाते हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं जलीय प्रवासी पक्षी की. भोजन-पानी की […]
आ गये विदेशी मेहमान ! :::: असंपादित 2हर साल आने वाले मेहमानों का शहर में पादार्पण हो चुका है. ये ऐसे मेहमान हैं जो दूर देश से शहर में आते हैं. कुछ महीने रहने के बाद वापस अपने देश लौट जाते हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं जलीय प्रवासी पक्षी की. भोजन-पानी की तलाश में ये मेहमान हजारों किलोमीटर की उड़ान भर यहां आते हैं. इसकी खासियत है कि ये एक बार जिस जगह पर आते हैं दोबारा भी उसी जगह पर और निश्चित समय पर ही आते हैं. शहर में आये ऐसे विदेशी पक्षियों पर लाइफ @ जमशेदपुर की रिपोर्ट … कौन हैं ये मेहमान शहर आने वाले मेहमान में वैग टेल यानी खंजन चिड़िया, रेड क्रेसटेड पोचार्ड या लाल सर, नॉर्दन पिनटेल, डार्टर, जाकाना, स्पॉटेड पाइपर, गडुवाल, लार्ज ग्रेब आदि करीब 20-22 तरह के पक्षी शामिल हैं. कहां से आते हैं पक्षी रिसर्च के मुताबिक ये मेहमान ट्रांस हिमालयन एरिया, यूरोप के कुछ हिस्से, बलूचिस्तान, रूस के कुछ भाग, साइबेरिया व कश्मीर रीजन से आते हैं. कब आते हैंजानकारों की राय में सिंहभूम रीजन में ये पक्षी प्राय: सितंबर के दूसरे सप्ताह में आना शुरू कर देते हैं. कई बार इन्हें अगस्त के अंतिम सप्ताह में भी देखा गया है. ये यहां करीब छह महीने रहते हैं. गरमी पड़ने पर मध्य मार्च तक ये लौट जाते हैं. जिंदा रहने के लिए छोड़ते हैं जगह ऐसे पक्षी जिस समय शहर आते हैं उस दौरान ट्रांस हिमालयन एरिया का तापमान शून्य डिग्री और माइनस में चला जाता है. इस वजह से इन पक्षियों के आहार कीड़े-मकोड़े आदि बर्फ के अंदर चले जाते हैं. ऐसे में इन्हें भोजन मिलना मुश्किल हो जाता है. सर्दी में भूख अधिक लगती है. दिन भी छोटा होता है. इस वजह से आसपास कहीं भोजन की तलाश नहीं की जा सकती है. इस कारण भोजन की तलाश में ये दूर की उड़ान भरते हैं. पिरयोडिकली करते हैं मूवमेंट ये पक्षी जहां से चलते हैं उसे ब्रिडिंग साइड और जहां प्रवास करते हैं उसे विंटर साइड कहा जाता है. ब्रिडिंग साइड से विंटर साइड के मूवमेंट को पिरयोडिकली मूवमेंट कहा जाता है. ये ब्रिडिंग साइड से गोल आेरिएंटेड नेविगेशन करते हैं. यानी गंतव्य स्थान तक पहुंचने के दौरान पिछले साल जहां-जहां रुके, इस बार भी वहां-वहां ही रुकते हैं. ये जलीय पक्षी प्राय: झुंड में चलते हैं. जानकारों की राय में प्रवास के दौरान ये एक बार जहां आते हैं, अगले साल भी वहीं पर आते हैं. अन्य जगह हरगिज नहीं जाते. हां, यह जरूर है कि ये लोकल माइग्रेशन करते हैं. यानी भोजन की खोज में शहर में ही एक तालाब से दूसरे तालाब पर जाते हैं. एक शहर से दूसरे शहर नहीं जाते. कब भरते हैं उड़ान उड़ान भरने वाले छोटे-बड़े हर आकार के पक्षी होते हैं. इनमें बड़े पक्षी दिन में उड़ान भरते हैं. बड़ा होने की वजह से इन्हें रास्ते में किसी तरह के शिकारी बाज आदि से डर नहीं लगता. कहां भोजन मिलेगा इन्हें मालूम होता है. इसलिए ये रास्ते में रुक भी जाते हैं. रात में ये विश्राम करते हैं. अगली सुबह फिर उड़ान भरते हैं. इसके विपरीत छोटे पक्षी को दिन में बाज आदि बड़े पक्षी का डर रहता है. इसलिए ये रात में ही उड़ान भरते हैं. गौर करने वाली बात है कि ये रातभर लगातार उड़ते हैं. कहीं विश्राम नहीं करते. ऐसे माइग्रेशन को नोकटरनल माइग्रेशन कहा जाता है. इन छोटे पक्षियों को फिंच कहते हैं. दिनभर देते हैं दिखायी ये पक्षी दिनभर में कभी भी दिखायी दे सकते हैं. ऐसा नहीं है कि केवल सुबह या शाम में ही दिखायी दें. ये दोपहर में भी भोजन की तलाश कर सकते हैं. ये ऐसे तालाब पर ही जाना पसंद करते हैं जहां किसी तरह का डिस्टरबेंस नहीं हो. किसी तरह के शोरगुल व अन्य खतरा का अंदाजा होने पर ये उस जगह को छोड़ देते हैं. भोजन के बाद ये प्राय: आसपास के पेड़ों पर ही विश्राम करते हैं. कुछ पक्षी ऐसे भी होते हैं जो दिनभर भोजन के बाद रात में भी पानी में रह जाते हैं. ये पानी में ही तैरते हुए सो जाते हैं. कब लौटते हैं शहर का तापमान जब 35 डिग्री के आसपास होने लगता है तो ये लौटने लगते हैं. यह समय मध्य मार्च का होता है. इस समय तक ट्रांस हिमालय आदि एरिया में बर्फ पिघलने लगती है. यहां का तापमान भी थोड़ा अधिक हो जाता है. इन जलीय पक्षियों के भोजन अब मिलने लगते हैं. इस वजह से ये वापस नेटिव प्लेस में लौट जाते हैं. कुछ जगह देने लगे हैं कम दिखायी आज से कुछ साल पहले तक ये जलीय पक्षी शहर के प्राय: हर तालाब में दिखायी देते थे. लेकिन अब कुछ जगह कम दिखायी देते हैं. कोऑपरेटिव कॉलेज के जंतु विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो के के शर्मा बताते हैं कि जब से जुबिली पार्क स्थित लेक में बोटिंग शुरू हुआ तब से इन प्रवासी पक्षियों का यहां आना कम हो गया है. इसी तरह से अन्य इलाके में जहां डिस्टरबेंस हो रही है वहां से ये दूर जा रहे हैं. इसका स्वाभाव है कि ये किसी तरह के खतरा में शिकार नहीं करते. ट्रांस हिमालयन इलाके में किसी तरह का खतरा नहीं होता. बॉक्स शहर में कहां-कहां दिखते हैं- टिस्को प्लांट लेक (यहां कई प्रजाति के प्रवासी पक्षी दिखायी देते हैं)- ब्ल्यू स्कोप (नॉर्थ एग्रिको एरिया)- डिमना लेक – जुबिली पार्क लेक – स्वर्णरेखा तट कोट शहर में 20-22 प्रजाति के प्रवासी पक्षियों का अध्ययन किया गया है. इन पक्षियों आना और जाना ट्रांस हिमालयन एरिया में बर्फबारी और शहर में पड़ने वाली गर्मी पर निर्भर करता है. जल्दी बर्फबारी पर ये जल्दी आ जाते हैं. यहां जल्दी गर्मी पड़ने पर चले भी जल्दी जाते हैं. प्रवास करने वाले छोटे पक्षी आंतरिक रूप से काफी मजबूत होते हैं. यही कारण है कि ये रातभर बिना रुके ऑन विंग उड़ान भरते हैं. इस दौरान कहीं भोजन नहीं करते. प्रवासी जलीय पक्षी की यह भी खूबी है कि ये एक बार जिस जगह पर आते हैं अगली बार भी उसी जगह पर और प्राय: उसी समय में आते हैं.- प्रो के के शर्मा, जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष, कोऑपरेटिव कॉलेज
