गुनाह करने वाले हाथों ने बंजर जमीन को किया हरा-भरा
– अपनी मेहनत से बंदी जेल में उगा रहे सब्जी – पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझा बंदियों ने संवाददाता, जमशेदपुर पर्यावरण के प्रति आम नागरिक भले ही गंभीर न हो, लेकिन वर्षों से जेल में जाने-अनजाने में हुए गुनाहों की सजा काट रहे घाघीडीह जेल के बंदी अपनी मेहनत से पर्यावरण को हरा-भरा रखने […]
– अपनी मेहनत से बंदी जेल में उगा रहे सब्जी – पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझा बंदियों ने संवाददाता, जमशेदपुर पर्यावरण के प्रति आम नागरिक भले ही गंभीर न हो, लेकिन वर्षों से जेल में जाने-अनजाने में हुए गुनाहों की सजा काट रहे घाघीडीह जेल के बंदी अपनी मेहनत से पर्यावरण को हरा-भरा रखने के साथ सब्जियों की पैदावार कर रहे हैं. पर्यावरण बचाने के लिए बंदियों ने अपनी मेहनत से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनूठी पहल की है. जाने-अनजाने में बने गुनाहगारों के हाथ पर्यावरण के महत्व को समझते हुए इसकी रक्षा के लिए आगे बढ़े है. बंदियों के इस प्रयास में जेल प्रशासन ने पूरा सहयोग दिया, तो —- संस्था ने अहम भूमिका निभायी. — संस्था की ओर से — पेड़ जेल प्रशासन को उपलब्ध कराया गया. उम्रकैद के बंदी करते हैं देखभालआजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों के जिम्मे पेड़ों की देखभाल की जिम्मेवारी है. जेल के बाहरी हिस्से में लगे पौधों को — द्वारा स्वयं देखभाल किया जाता है. जेल के अंदर के पेड़ों की देखभाल बंदी ही करते हैं. बकायदा सभी दिन पौधे में पानी डाला जाता है. बंजर जमीन को उपजाऊ बना सब्जी उगायी जेल के भीतर की बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर बंदी सोना (सब्जी) निकाल रहे हैं. कड़ी मेहनत और बंदियों के जज्बे ने पथरीली जमीन को हरा-भरा बना दिया है. अब इस जमीन पर इतनी सब्जियां उग रहा है, कि जेल में बंदियों को आलू कम और हरी सब्जियां अधिक मिल रही है. जेल के अंदर हो रही सब्जी की खेती में हर बंदी को अलग-अलग जिम्मेवारी सौंपी गयी है. लौकी, टमाटर, मिरची, फूल गोभी, पालक, बंद गोभी समेत सीजन की सभी सब्जियों की खेती हो रही है.
