आदित्यपुर व बिरसानगर में बाबा नाम केवलम कीर्तन आयोजित

हेडिंग::: परम पुरुष बगैर जीव जीवित नहीं रह सकता : आनंद (फोटो : 17 आनंद मार्ग)लाइफ रिपोर्टर@जमशेदपुरआनंद मार्ग की ओर से आदित्यपुर के माझी टोला स्थित रैन बसेरा में छह घंटे और बिरसानगर जोन नंबर-1 में तीन घंटे का बाबा नाम केवलम् अखंड कीर्तन संपन्न हुआ. इस अवसर पर लाल बिहारी आनंद ने बताया कि […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 17, 2015 9:05 PM

हेडिंग::: परम पुरुष बगैर जीव जीवित नहीं रह सकता : आनंद (फोटो : 17 आनंद मार्ग)लाइफ रिपोर्टर@जमशेदपुरआनंद मार्ग की ओर से आदित्यपुर के माझी टोला स्थित रैन बसेरा में छह घंटे और बिरसानगर जोन नंबर-1 में तीन घंटे का बाबा नाम केवलम् अखंड कीर्तन संपन्न हुआ. इस अवसर पर लाल बिहारी आनंद ने बताया कि शास्त्र में परम पुरुष का एक नाम है-विष्णु. संस्कृत में ‘विश्’ (प्रवेश करना) धातु से निष्पन्न ‘विष्णु’ शब्द का अर्थ है- व्यापनशील. यानी जो प्रत्येक सत्ता के अंदर अनुप्रविष्ट होकर रहते हैं. असीम, अनंत, अखंड, सर्वज्ञ, सर्वव्यापी इस सत्ता के कारण ही विश्व की अन्यान्य खंड सत्ताएं टिकी हुई हैं. जिस प्रकार जल के बिना मछली नहीं रह सकती उसी प्रकार परम पुरुष के बिना जीव भी जीवित नहीं रह सकता है. किसी भी चीज का अस्तित्व नहंीं रह सकता. वस्तुत: अनेक अस्तित्व के कारण ही सभी कुछ अस्तित्ववान हैं. फिर यह बात भी सही है कि वे कहीं प्रकट और अप्रकट हैं. शास्त्र में देवर्षि नारद ने शायद एक बार विष्णु से पूछा-हे प्रभु, आप तो सर्वत्र विद्यमान हैं, लेकिन सभी जगहें आपकी पसंद की नहीं भी हो सकती हैं. अत: यज जानने की मुझे बहुत इच्छा है कि आपका सबसे प्रिय स्थान कौन सा है. उत्तर में विष्णु ने कहा- हे नारद, मैं वैकुंठ में भी नहीं रहता हूं, योगियों के हृदय में भी नहीं रहता हूं, मेरा प्रिय स्थान वही है जहां मेरे प्रिय भक्तगण जी खोलकर मेरा स्मरण करते हुए भजन-कीर्तन करते हैं. इस अवसर पर योगेश, सुनिल आनंद, पीएन राय, केदार, विजय बहादुर सिंह, सुधीर सिंह, बीएन कुमार, विश्वनाथ, राकेश व गौतम आदि मौजूद थे.