पुरानी डीपीआर से काम पर अड़े सांसद

जमशेदपुर: बागबेड़ा व छोटागोविंदपुर जलापूर्ति योजना को पुरानी डीपीआर पर शुरू करने पर सांसद विद्युत वरण महतो व विधायक मेनका सरदार अड़ गयी है. सोमवार को झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के साथ हुई बैठक में सांसद श्री महतो ने विश्व बैंक पोषित जलापूर्ति की दोनों योजना को बिना समय गंवाये काम […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | January 20, 2015 8:41 AM
जमशेदपुर: बागबेड़ा व छोटागोविंदपुर जलापूर्ति योजना को पुरानी डीपीआर पर शुरू करने पर सांसद विद्युत वरण महतो व विधायक मेनका सरदार अड़ गयी है. सोमवार को झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के साथ हुई बैठक में सांसद श्री महतो ने विश्व बैंक पोषित जलापूर्ति की दोनों योजना को बिना समय गंवाये काम शुरू करने की मांग की.
सांसद ने मंत्री को बताया कि पांच-छह वर्षो से योजना के लिए कागज पर डीपीआर बनाने का काम किया है. अंतिम बार 2014 में योजना के डीपीआर को विश्व बैंक, राज्य सरकार और भारत सरकार के स्तर से मंजूरी मिली थी. अब इसमें त्रुटि निकालने और नया डीपीआर बनाने के लिए छह माह का समय लगने से योजना लटकने की आशंका जतायी.
इस पर मंत्री ने योजना को जल्द धरातल पर लाने और पुराने डीपीआर से जलापूर्ति का काम शुरू करने का आश्वासन दिया. इधर, बैठक के बाद जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो ने प्रभात खबर को बताया कि बागबेड़ा और छोटागोविंदपुर जलापूर्ति का काम पुराने डीपीआर से जल्द शुरू होगा. इसके लिए विभागीय मंत्री के साथ हुई बैठक में उन्होंने जल्द काम शुरू करने का आश्वासन दिया है.
कहां है पेंच
विश्व बैंक पोषित बागबेड़ा और छोटागोविंदपुर जलापूर्ति योजना में विश्व बैंक की टीम ने डीपीआर में स्वीकृति के बाद जलापूर्ति के लिए बनाये आंकड़े को गलत ठहराया है. काल्पनिक आंकड़े और योजना को धरातल पर शुरू होने से होने वाली परेशानी को ससमय दूर करने के लिए पुराने डीपीआर को बदलने और संशोधन कर डीपीआर बनाने को कहा है. इसके बाद योजना के कार्यान्वयन में पेंच लग गया है. इससे दोनों जलापूर्ति से जुड़े चार लाख की आबादी अधर में फंसी हुई है.ं योजना पर इस क्षेत्र में रहनेवाली आबादी की नजरें लगी हुई है. पानी संकट से जूझने को मजबूर लोगों की इस योजना से उम्मीदें बंधी है.