शहर के सरकारी आश्रयगृहों की स्थिति खराब है. कहीं मच्छर का प्रकोप है तो कहीं आश्रयगृहों में आधारभूत सुविधाओं की कमी है. इन आश्रयगृहों में रात गुजारने के लिए आने वालों के लिए सुविधाओं की बात कौन करे रात-भर तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जाड़े के मौसम में इन आश्रयगृहों में प्रशासनिक दावे के बीच जमीनी हकीकत क्या है, इसकी प्रभात खबर ने ऑन स्पॉट जायजा लिया.
भुइयांडीह चंडीनगर :
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से भुइयांडीह चंडीनगर में भवन बनाया गया है. यहां चौकी समेत अन्य आधारभूत संरचना दी गयी है, लेकिन यहां बिजली की तार अौर बल्ब खराब है. आस-पास गंदगी के कारण काफी मच्छर हैं. रविवार की रात यहां छह बेड पर दो दिव्यांग महिला मौजूद थी. उन्हें रात के अंधेर में रात गुजारने में काफी दिक्कत हो रही थी.
कदमा शास्त्रीनगर ब्लॉक नंबर 5
कदमा के आश्रयगृह में सात बेड में बिजली की सुविधा तो है, लेकिन प्रथम तले में लगा पंखा खराब है. आश्रयगृह के बाहर बस्ती के लोग कचरा फेकते हैं. आश्रयगृह के अंदर बदबू के साथ-साथ मच्छर का प्रकोप होने से यहां पंखा चला कर ही सोया जा सकता है. रविवार रात को प्रभात खबर टीम को संतोष कुमार धीर (पोटका निवासी) बताया कि कई दिनों से पंखा खराब है, इसकी शिकायत भी की गयी, लेकिन वह पंखा ठीक नहीं हुआ.
समय : साकची गोलचक्कर
साकची गोलचक्कर से लेकर मेन रोड अौर बाजार के रोड में गरीब, कचरा, प्लास्टिक आदि चुनने वाले गुलगुलिया बच्चेे-बच्चियां दुकानों के बरामदा में रात गुजारते हैं. कई बच्चे प्लास्टिक तो बोरा ओढ़कर, कई बरामदे में रात गुजार रहे हैं. दो अलग-अलग दुकानों के सामने में साधु व भिखारी खुले आसमान के नीचे रात गुजराने को
मजबूर हैं.
