जी प्लस-2 से ऊंची बिल्डिंग संभव नहीं

जमशेदपुर: शहर में टाटा सब लीज इलाके में जी प्लस टू से ऊंची बिल्डिंग का नक्शा पारित करने (एनओसी देने) में टाटा स्टील ने असमर्थता जतायी है. कंपनी का कहना है कि जी प्लस टू से ऊंची बिल्डिंग बनने से जनसंख्या का अत्यधिक बोझ बढ़ेगा. बिजली, पानी व ड्रेनेज की व्यवस्था बहाल करना संभव नहीं […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 23, 2014 9:34 AM

जमशेदपुर: शहर में टाटा सब लीज इलाके में जी प्लस टू से ऊंची बिल्डिंग का नक्शा पारित करने (एनओसी देने) में टाटा स्टील ने असमर्थता जतायी है. कंपनी का कहना है कि जी प्लस टू से ऊंची बिल्डिंग बनने से जनसंख्या का अत्यधिक बोझ बढ़ेगा. बिजली, पानी व ड्रेनेज की व्यवस्था बहाल करना संभव नहीं होगा. गुरुवार को रांची में विधानसभा की ध्यानाकर्षण व प्रश्न समिति की बैठक हुई.

इसमें कमेटी के सभापति विधायक अरविंद सिंह, विधायक सीपी सिंह, रामचंद्र बैठा, नगर विकास सचिव अजय कुमार सिंह, जमशेदपुर के डीसी डॉ अमिताभ कौशल, एडीसी गणोश कुमार, जेएनएसी के विशेष पदाधिकारी दीपक सहाय, टाटा स्टील की ओर से लैंड डिपार्टमेंट के अजय सहाय, कॉरपोरेट रिलेशन के चीफ एमजी सिंह मौजूद थे. बैठक में सब-लीज वाले क्षेत्र के लिए लंबित एनओसी पर भी चर्चा हुई. जुस्को द्वारा पानी, बिजली का कनेक्शन काटे जाने मामले में विधायक अरविंद सिंह ने अपनी आपत्ति दर्ज करायी. कमेटी के सभापति का कहना था कि कंपनी को इस पर विचार करना चाहिए. टाटा स्टील की ओर से शेष पेज 15 पर

जी प्लस टू से ज्यादा का नक्शा पास नहीं किये जाने से छह सौ करोड़ से ज्यादा का व्यवसाय प्रभावित है. नगर विकास सचिव अजय कुमार सिंह की ओर से भी वहां की बुनियादी सुविधाओं की भी जानकारी ली गयी. उन्होंने कंपनी के परेशानियों को भी जानने की कोशिश की. कमेटी की बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका. सभापति श्री सिंह ने इसकी अगली बैठक बुलायी है और इस पर विस्तार से चर्चा की जायेगी. जून के प्रथम सप्ताह में ध्यान आकर्षण कमेटी जांच करने शहर आयेगी. ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से जनसंख्या बढ़ रही हैं. शहरी क्षेत्र और ग्रामीण इलाकों से सट रहे है. ऐसे में इन इलाकों में काफी तेजी से अपार्टमेंट बन रहे है. इन जगहों पर बन रहे अपार्टमेंट, कांप्लेक्स का नक्शा पास कराना होगा. इससे संबंधित मामलों पर नगर विकास विभाग के सचिव ने बताया कि पंचायत समिति को अधिकार दिये जाने पर मंथन चल रहा है. कई राज्यों से इससे संबंधित रिपोर्ट मांगा गया है. जिस पर अध्ययन किया जा रहा है. जल्द ही सरकार इस मामले में निर्णय लेगी.