बरही. बरही के कोनरा में मुस्लिम आवामी तंजीम की सरजमीं पर दो जून की रात भव्य आज़मते-मुस्तफ़ा कॉन्फ्रेंस (जलसा) का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि देश के जाने माने उलेमा पीर साहब अल्लामा मौलाना सैयद शाह गुलज़ार इस्माइल वास्ती कादरी थे. उन्होंने अपनी तकरीर में कहा कि देश को इस समय कौमी मिल्लत व एकता की सबसे ज्यादा जरूरत है. इसके बिना हम अपने वतन भारत क़ो बेहतर और हर भारतीय का भारत नहीं बना सकते. मज़हबे-इस्लाम में हुब्बुल वतनी यानी देश भक्ति को आधा ईमान कहा गया है. हमने ब्रिटिश हुकूमत से देश की आजादी के जंग में कुर्बानियां देकर इसकी मिसाल कायम की थी. आज भी देश को जरूरत पड़ेगी तो हम कुर्बानी देंगे. देश की एकता को तोड़ने की हर नापाक कोशिश का हम मुंहतोड़ जवाब देंगे. उन्होंने नौजवानों को आगाह किया कि किसी उकसावे की साजिश का शिकार न बनें, बल्कि ऐसे साजिश को बेनकाब करें. यही हमारा मजहबी व राष्ट्रीय फर्ज है. उन्होंने देश में अमन-चैन के लिए दुआएं की. साइंस व टेक्नोलॉजी की शिक्षा से ही कौम की तरक्की वहीं, हजरत अल्लामा मौलाना मुफ्ती गुलाम जिलानी अजहरी ने तालीम पर जोर दिया. कहा कि अपने बच्चों की बेहतरीन दिनी व दुनियावी तालीम की व्यवस्था करें. दुनिया में उसी कौम की तरक्की होती है, जिसने साइंस और टेक्नोलॉजी की शिक्षा में बढ़त हासिल की है. सैयद कामरान हसीब ने भी तकरीर की. नात खां महबूब अजहर देहलवी व डॉ संजर कलकतवी ने नातिया कलाम पेश किया. जलसा का संचालन बरही जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मुसर्रफुल कादरी ने की. हाफीज कलीमउद्दीन रिज़वी, कारी अब्दुल क़ैयुम, मौलाना महमूद रजा, मौलाना जमशेद जौहर, कारी दाऊद, हाफिज फिरोज, इकबाल दानिश, वासिफ शाह हुदा, हजरत कारी जफर अकील, मौलाना रिजवान अहमद रिजवी ने भी शिरकत की. जलसा को सफल बनाने में मुस्लिम आवामी तंजीम, बरही जामा मस्जिद, मदीना मस्जिद, मक्का मस्जिद, अल अक्सा मस्जिद, अल कूबा मस्जिद के ओहदेदार व कोनरा के नौजवानों ने योगदान दिया.
मुल्क को इस वक्त कौमी मिल्लत की ज्यादा जरूरत : मौलाना सैय्यद
बरही के कोनरा में आजमते-मुस्तफा कॉन्फ्रेंस का आयोजन
