संजय कुमार यादव
हजारीबाग जिले के पदमा प्रखंड के मध्य विद्यालय केवला को उत्क्रमित कर उच्च विद्यालय बने 10 साल बीत गये, लेकिन अब तक यहां उच्च विद्यालय के एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई है. शिक्षक के अभाव में कक्षा नौवीं और दसवीं के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्राथमिक शिक्षकों के भरोसे चल रही है. गणित, विज्ञान समेत कई महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई नहीं होने से बच्चों को खुद तैयारी कर मैट्रिक की परीक्षा देनी पड़ रही है. इसका असर विद्यालय के मैट्रिक परीक्षा परिणाम पर भी पड़ा है. वर्तमान में कक्षा नौवीं और दसवीं में करीब 55 विद्यार्थी नामांकित हैं.
10 साल बाद भी शिक्षक नियुक्ति का इंतजार
वर्ष 2016 में मध्य विद्यालय केवला को उत्क्रमित उच्च विद्यालय बनाया गया था. विद्यालय के आसपास के बरदेवा, पिंडारकोण, भंडरा, सिमरकुरहा, नचनबे, गारूकुरहा, कलर, गोतिया और कोनिया समेत करीब एक दर्जन गांवों के बच्चों और अभिभावकों में खुशी थी. शुरुआत में उच्च कक्षाओं में सौ से अधिक विद्यार्थियों ने नामांकन कराया. उस समय जल्द शिक्षक नियुक्त करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन 10 वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस है.
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शिक्षकों की कमी से घटे छात्र, दूर के स्कूलों में दाखिले को मजबूर
नामांकन में भी आयी कमी : शिक्षकों की कमी के कारण अब विद्यालय में बच्चों की संख्या घटकर करीब आधी रह गयी है. प्रभारी शिक्षक के अनुसार प्राथमिक शिक्षकों के माध्यम से जितना संभव हो पाता है, उतनी पढ़ाई करायी जाती है. शिक्षक नहीं होने के कारण आसपास के बच्चे अब यहां नामांकन लेने से बच रहे हैं. मजबूरन कई विद्यार्थी पांच से सात किलोमीटर दूर सरैया और पदमा उच्च विद्यालय में नामांकन करा रहे हैं.
कई बार अधिकारियों को लिखा पत्र
कई बार अधिकारियों को लिखा पत्र : शिक्षकों की नियुक्ति की मांग को लेकर विद्यालय के प्रभारी शिक्षकों ने कई बार शिक्षा विभाग और जिला के वरीय अधिकारियों को पत्र लिखा. प्रबंधन समिति और अभिभावकों ने भी पिछले 10 वर्षों में स्थानीय विधायकों के समक्ष समस्या रखी, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं हुआ. अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक नहीं मिलने से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है.
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