मानसून की मार: हजारीबाग जोन के 17 जलाशयों में अब तक नहीं भर पाया पानी, आधे से अधिक डैम 70% से नीचे

हजारीबाग जल संसाधन जोन के जलाशयों में इस साल मानसून में पानी की भारी कमी देखी जा रही है। आधे से अधिक बांधों में जलस्तर 70% से नीचे है, जिससे आगामी रबी फसल की सिंचाई प्रभावित होने की आशंका है।



Hazaribagh News: हजारीबाग जल संसाधन जोन के जलाशयों में इस साल के मानसून में अब क्षमता के अनुसार पानी नहीं भर पाया है. हजारीबाग के जल संसाधन जोन के मुख्य अभियंता विजय भगत ने 26 अगस्त 2026 तक जोन समेत चार जिलों के 17 मध्यम एवं लघु सिंचाई जलाशयों में उपलब्ध पानी का ताजा आंकड़ा जारी किया है. रिपोर्ट के अनुसार, जोन के हजारीबाग, चतरा, कोडरमा और रामगढ़ के अधिकांश जलाशय अब भी पूरी क्षमता तक नहीं भर पाए हैं. कोनार डैम और केसो डैम को छोड़ दें, तो आधे से अधिक जलाशयों में पानी का स्तर 70 प्रतिशत से नीचे है. इसका सीधा असर आगामी रबी फसल की सिंचाई पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस सूची में हजारीबाग का छड़वा डैम और कोडरमा का तिलैया डीवीसी डैम शामिल नहीं हैं, क्योंकि दोनों अलग परिक्षेत्र के बड़े जलाशय हैं.

कोनार डैम सबसे मजबूत स्थिति में

जोन के मुख्य अभियंता की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक हजारीबाग का कोनार डैम सबसे बेहतर स्थिति में है. इसकी कुल क्षमता 233.50 एमसीएम है, जिसमें वर्तमान में 215.20 एमसीएम यानी 92 प्रतिशत पानी उपलब्ध है. कोडरमा का केसो डैम 71 प्रतिशत पानी के साथ दूसरे स्थान पर है. वहीं, लोतिया डैम में 73 प्रतिशत, अंजनवा में 70 प्रतिशत और बरही डैम में 69 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया है. इसके बाद अधिकांश जलाशयों का स्तर लगातार नीचे जाता दिखाई देता है.

आधे से अधिक डैम 70 प्रतिशत से नीचे

रिपोर्ट के अनुसार कई जलाशय चिंताजनक स्थिति में हैं. चतरा का बोख्सा डैम 68 प्रतिशत, घघरा 65 प्रतिशत और हीरू 62 प्रतिशत पर है. रामगढ़ के नलकरी और गोंदा डैम 64 प्रतिशत, जमुनिया 61 प्रतिशत और चापी केवल 57 प्रतिशत तक सिमट गया है. सबसे कम पानी कोडरमा के पंचखेरो डैम में दर्ज किया गया है, जहां केवल 54 प्रतिशत क्षमता तक ही पानी उपलब्ध है. दुलकी और सलैया डैम भी 60 से 61 प्रतिशत के आसपास हैं.

कम पानी के पीछे तीन बड़ी वजह

विभाग ने जलाशयों में अपेक्षा से कम पानी जमा होने के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं.

  • पहला कारण मानसून का लंबा ब्रेक रहा. जुलाई के दूसरे पखवाड़े में करीब 20 दिनों तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से कैचमेंट क्षेत्र सूख गया और जलाशयों में अपेक्षित जल प्रवाह नहीं पहुंच सका.
  • दूसरा कारण छोटे जलाशयों में वर्षों से डिसिल्टिंग नहीं होना है. विभाग के अनुसार पांच से सात वर्षों से अधिकांश डैमों की सफाई नहीं हुई, जिससे उनकी जलधारण क्षमता करीब 15 से 20 प्रतिशत तक घट गई है.
  • तीसरा कारण अतिक्रमण और लीकेज बताया गया है. पहाड़ी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई से पानी तेजी से बहकर निकल जाता है, जबकि कई जलाशयों के फाटकों से लगातार रिसाव भी हो रहा है.

रबी फसल पर पड़ेगा असर

जलाशयों में कम पानी का असर सबसे ज्यादा किसानों पर पड़ सकता है. विभाग के अनुसार दुलकी, चापी, पंचखेरो, सलैया समेत छह जलाशय 60 प्रतिशत या उससे कम स्तर पर हैं. इनके कमांड एरिया में गेहूं और चना जैसी रबी फसलों की सिंचाई प्रभावित होने की आशंका है. करीब 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई संकट की संभावना जताई गई है. वहीं, चतरा के हीरू और घघरा जलाशयों पर निर्भर लगभग 40 गांवों में धान कटाई के बाद पानी की उपलब्धता सीमित रह सकती है.

किसानों के लिए राहत की उम्मीद भी

हालांकि पूरी तस्वीर निराशाजनक नहीं है. कोनार डैम में 215.20 एमसीएम और केसो डैम में 19.02 एमसीएम पानी होने से हजारीबाग और रामगढ़ के करीब 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी सिंचाई संभव मानी जा रही है. इसके अलावा जिन किसानों ने तालाब और डोभा का निर्माण कराया है, उन्हें विभाग की ओर से सोलर पंप पर अनुदान का लाभ भी मिलेगा.

पहले पेयजल, फिर सिंचाई: मुख्य अभियंता

मुख्य अभियंता विजय भगत ने बताया कि छड़वा और तिलैया को छोड़कर उनके परिक्षेत्र के 17 जलाशयों में फिलहाल औसतन 65 प्रतिशत पानी उपलब्ध है. उन्होंने कहा, "कोनार और केसो में स्थिति अच्छी है, लेकिन पंचखेरो, चापी और दुलकी जैसे जलाशयों में पानी कम है. इसका सबसे बड़ा कारण कम बारिश है. सभी कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया गया है कि पहले पेयजल सुरक्षित रखा जाए, उसके बाद रोस्टर के अनुसार किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाए." उन्होंने यह भी बताया कि कम पानी वाले जलाशयों की डिसिल्टिंग का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है. साथ ही किसानों से सरसों और चना जैसी कम पानी वाली फसलों की खेती अपनाने की अपील की गई है.

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सितंबर की बारिश से सुधर सकती है स्थिति

विभाग का अनुमान है कि यदि सितंबर में लगभग 50 मिमी अतिरिक्त बारिश हो जाती है, तो हजारीबाग परिक्षेत्र के अधिकांश जलाशयों का जलस्तर 75 प्रतिशत से ऊपर पहुंच सकता है. फिलहाल विभाग की प्राथमिकता पेयजल सुरक्षा बनाए रखने और उपलब्ध पानी का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने पर है.

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By Arif

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