हजारीबाग : झारखंड जन संस्कृति मंच हजारीबाग का मासिक कवि सम्मेलन कोर्रा देवांगना चौक स्थित मिरेकल इंग्लिश कोचिंग सेंटर में हुआ. इसमें करीब 30 रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं. कार्यक्रम में प्रसिद्ध आलोचक डॉ बलदेव पांडेय, हरेंद्र कुमार और राजेश कुमार दुबे मौजूद थे.
प्राध्यापिका सह कवयित्री डॉ प्रमिला गुप्ता ने ‘सावन की मेहंदी’ और ‘कोयलिया’ का पाठ किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा. विजय कुमार कर्ण ने ‘जीवन की आखिरी शाम आयी’, संजय हजारीबागी ने ‘रक्षक ही भक्षक बन बैठा’ और ‘अपनी फीकी चाय’ सुनायी. श्रुति मंजरी मिश्रा ने ‘न जाने कब मुलाकात होगी’ और सुप्रिया रश्मि ने ‘प्रेम का एक संगीत मुझे गाकर सुनाना’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया.
कविता, गजल और शायरी से सजी साहित्यिक शाम
शायर वसीम गिलानी ने शायरी और डॉ कविता सिन्हा ने सावन पर कविता सुनायी.चक्रपाणि मिश्रा ने ‘समर शेष है, अरि समूह है, अभेद्य व्यूह है, असाध्य लक्ष्य है पर प्रत्यक्ष है’ कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं को प्रभावित किया. गजलकार रुबीना वफा, विजय कुमार राणा, पांडे गोपी कृष्ण सहाय, पूनम त्रिवेदी श्लाघ्या और समाजसेवी संजय तिवारी ने भी रचनाएं सुनायीं. झारखंड पेंशनर कल्याण समाज की नयी कमेटी के अध्यक्ष राजू विश्वकर्मा ने पशु बलि और जानवरों की हत्या पर मार्मिक कविता प्रस्तुत की.
हास्य-व्यंग्य, गजल और कविताओं से रचनाकारों ने बांधा समां
खान एवं भूतत्व के उपनिदेशक कुणाल कौशल ने ‘संघर्ष से सृजन’ पर सारगर्भित रचना सुनायी. मेजर कुमार संजय ने राजनीति और समाज से जुड़े हास्य-व्यंग्य की पंक्तियां प्रस्तुत कीं. राजेश दुबे ने ‘आंधी में तूफान में दूब नहीं घबराती है’ और हरेंद्र कुमार ने ‘कभी उनका पता थे हम, पर अब पहचानते नहीं’ गजल सुनाया. डॉ विनोद कुमार गुप्ता, अर्जुन कुमार, मिथिलेश कर्ण, सरयू प्रसाद, मुमताज अहमद, सुरेश राम और तबरेज खान समेत अन्य रचनाकारों ने भी प्रस्तुति दी. संचालन डॉ प्रमिला गुप्ता ने किया. धन्यवाद ज्ञापन शंकर गुप्ता ने किया.
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