हजारीबाग. विभावि में विश्व पर्यावरण दिवस पर भूगोल विभाग ने व्याख्यान का आयोजन किया. मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त महाप्रबंधक (सीसीएल) इंजीनियर एसके पांडेय ने कहा कि खनन मानव सभ्यता के विकास और औद्योगिक क्रांति का महत्वपूर्ण आधार रहा है. ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता, औद्योगिक विकास तथा आर्थिक प्रगति में खनिज संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों से भूमि क्षरण, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण तथा जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक खनन पद्धतियों तथा प्रभावी पर्यावरण प्रबंधन के माध्यम से इन दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण हेतु पर्यावरण प्रभाव आकलन, प्रदूषण नियंत्रण उपायों, खदान क्षेत्रों में पौधारोपण तथा परित्यक्त खदानों के पुनर्वास की आवश्यकता पर बल दिया. कहा कि खनन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित कर ही सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है. भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ सरोज कुमार सिंह ने विषय प्रवेश कराया. कहा कि पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है. इसके बिना मानव अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती. वर्तमान समय में खनन से उत्पन्न पर्यावरणीय समस्याएं, वनों की कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन तथा प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता जा रहा है. पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो कमला प्रसाद ने पर्यावरण संरक्षण एवं खनन गतिविधियों के दुष्प्रभावों पर विचार रखे. उन्होंने कहा कि अनियंत्रित एवं अवैज्ञानिक खनन पर्यावरण तथा मानव जीवन दोनों के लिए गंभीर खतरा बन गया है. पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ ओमप्रकाश महतो ने पर्यावरण संरक्षण के लिए तीन सिद्धांत खनन कम करना, पुनः उपयोग करना एवं पुनर्चक्रण पर प्रकाश डाला. मंच संचालन शोधार्थी जितेंद्र कुमार राणा ने किया. मौके पर विभाग के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे. धन्यवाद ज्ञापन विद्यार्थी तरुण कुमार दास ने किया.
खनन और पर्यावरण में संतुलन जरूरी : एसके पांडेय
विश्व पर्यावरण दिवस पर भूगोल विभाग में व्याख्यान
