हजारीबाग में जैन महिलाओं ने सुहाग दशमी पर की विशेष पूजा-अर्चना

हजारीबाग के जैन मंदिरों में महिलाओं ने सुहाग दशमी का व्रत रखकर अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भगवान जिनेंद्र देव की विशेष पूजा-अर्चना की.

हजारीबाग: जिले के दोनों दिगंबर जैन मंदिरों में महिलाओं ने सुहाग दशमी का व्रत रखकर पूजा-अर्चना की. व्रतधारी महिलाओं ने सोलह शृंगार कर भगवान जिनेंद्र देव की आराधना की और परिवार के सुख, शांति, समृद्धि एवं अखंड सौभाग्य की कामना की. महिलाओं ने अक्षय दशमी व्रत कथा का श्रवण कर धर्म के मर्म को आत्मसात किया.

अक्षय दशमी व्रत की कथा राजा मेघनाद और रानी पृथ्वीमति से जुड़ी

शास्त्रों में सुहाग दशमी को अक्षय दशमी और कलश दशमी के नाम से भी जाना जाता है. व्रत कथा राजा मेघनाद और रानी पृथ्वीमति से संबंधित है. इसमें पूर्व जन्म के कर्मों के प्रभाव और मुनिराज के आहार में अंतराय के फल का वर्णन है. शुभंकर मुनिराज के उपदेश से राजा-रानी ने कर्मों की धर्माराधना के लिए अक्षय दशमी व्रत अंगीकार किया.

24 तीर्थंकरों की स्थापना कर हुई विशेष पूजा-अर्चना

इस व्रत में 10 कलशों पर 24 तीर्थंकरों की स्थापना कर भगवान आदिनाथ की विशेष पूजा का विधान है. यह पर्व संयम, आत्मशुद्धि, दान, जीवदया और साधु-संतों के प्रति विनय व श्रद्धा की प्रेरणा देता है. जैन महिलाओं ने पूरे दिन भक्ति और धार्मिक आराधना में बिताया.

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By Sunil prasad

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