इंग्लैंड में सजा भारत का रंग, गणेशोत्सव में दिखी सांस्कृतिक एकता की झलक

इंग्लैंड के प्रेस्टन में भारतीय समुदाय ने गणेश पूजनोत्सव का जोरदार आयोजन किया. यह आयोजन भारत की विविधता और एकता का प्रतीक बना.

जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट

गुमलाः इंग्लैंड के प्रेस्टन में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों ने गणेश पूजनोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया. आयोजन में भारत के विभिन्न राज्यों से प्रेस्टन में रह रहे भारतीय मूल के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इस दौरान भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और आपसी एकता का सुंदर संगम देखने को मिला.

गुमला के पूर्व सैनिक अनिरुद्ध सिंह भी हुए शामिल

गणेश पूजनोत्सव में शामिल होने का अवसर गुमला जिले के रायडीह प्रखंड निवासी भूतपूर्व सैनिक अनिरुद्ध सिंह को भी मिला. उन्होंने कहा कि विदेश में रहने के बावजूद भारतीयों की अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति आस्था आज भी मजबूत है. गणेशोत्सव में अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से आये भारतीयों की सहभागिता ने ‘अनेकता में एकता’ की भावना को साकार किया.

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अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि प्रेस्टन में भारतीय समुदाय के लोगों को एक साथ देखकर उन्हें सहज ही ‘भारत भारती’ की याद आ गई. उन्होंने बताया कि गणेशोत्सव के अलावा यहां भारतीय समुदाय द्वारा दीपावली, होली और दशहरा जैसे पर्व भी उत्साहपूर्वक मनाये जाते हैं. ऐसे आयोजनों के माध्यम से विदेश में भी भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जीवंत झलक देखने को मिलती है.

त्योहारों से मजबूत हो रहा सामाजिक जुड़ाव

उन्होंने कहा कि भारतीय पर्व-त्योहारों के सामूहिक आयोजन से प्रवासी भारतीयों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव भी मजबूत होता है. इन आयोजनों में भारतीय महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है.

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‘साड़ी शो’ में सैकड़ों महिलाएं करती हैं सहभागिता

अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि उनकी बेटी बरखा रानी की पहल पर प्रेस्टन में विभिन्न भारतीय त्योहारों के आयोजन के साथ वर्ष में एक बार ‘साड़ी शो’ का भी आयोजन किया जाता है. इसमें सैकड़ों महिलाएं भारतीय परिधान साड़ी को प्रदर्शित करती हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विदेश में भी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ और राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को मजबूत करने का माध्यम बन रहे हैं.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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