डुमरी के स्कूलों में शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लागू हो

डुमरी के स्कूलों में शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लागू हो

प्रेम प्रकाश भगत,डुमरी

डुमरी प्रखंड के विद्यालयों में शिक्षकों के ड्रेस कोड को लेकर प्रभात खबर द्वारा आयोजित परिचर्चा में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं ने भाग लिया. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और आदर्श वातावरण बनाये रखने की आवश्यकता पर चर्चा करना था. वक्ताओं ने कहा कि कुछ वर्ष पहले सरकार ने सभी विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए एक निर्धारित ड्रेस कोड लागू किया था, ताकि विद्यालयों में अनुशासित और मर्यादित वातावरण कायम रहे. प्रारंभिक दिनों में इस नियम का पालन किया गया, लेकिन धीरे-धीरे अधिकांश विद्यालयों में इसे नजरअंदाज कर दिया गया. परिणामस्वरूप अब कई जगह शिक्षक-शिक्षिकाएं आधुनिक और फैशन आधारित परिधान पहनकर विद्यालय आने लगे हैं.

शिक्षा और अनुशासन का संबंध

वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं है, बल्कि यह बच्चों के चरित्र निर्माण का भी केंद्र होता है. किशोरावस्था के विद्यार्थियों के लिए विद्यालय का वातावरण अत्यंत संवेदनशील होता है. इस उम्र में बच्चों के शारीरिक और मानसिक बदलाव तेजी से होते हैं, इसलिए उनके सामने प्रस्तुत हर दृश्य और व्यवहार का उनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है. यदि शिक्षक अनुशासित और सादगीपूर्ण वेशभूषा में विद्यालय आते हैं, तो विद्यार्थियों की एकाग्रता और अध्ययन पर सकारात्मक असर पड़ता है.

वक्ताओं के विचार

– सुरेश शर्मा ने कहा कि ड्रेस कोड से शिक्षकों की पहचान और गरिमा बढ़ती है. इससे विद्यार्थियों में अनुशासन और समानता की भावना विकसित होती है.

– जगरनाथ भगत ने कहा कि शिक्षक समाज के मार्गदर्शक होते हैं. उनकी वेशभूषा सादगी और मर्यादा का संदेश देनी चाहिए. सरकार को इसे सख्ती से लागू करना चाहिए.

– मनान आलम ने सोशल मीडिया और बाहरी प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सकारात्मक वातावरण दें. शिक्षकों की वेशभूषा भी उसी वातावरण का हिस्सा है.

– अशोक केशरी ने कहा कि ड्रेस कोड केवल औपचारिक नियम नहीं है, बल्कि अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है.

– इग्नासियुस मिंज ने कहा कि विद्यार्थियों का मन संवेदनशील होता है. शिक्षक-शिक्षिकाओं को अपने पहनावे और आचरण दोनों में संतुलन बनाये रखना चाहिए.

– प्रीतम टोप्पो ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी विद्यालयों में दिए जाते हैं. शिक्षकों का व्यक्तित्व और वेशभूषा विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं.

– जगजीवन भगत ने कहा कि समाज, विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग को मिलकर ड्रेस कोड लागू करना चाहिए.

– फ़िरासत अली ने कहा कि जब बच्चों के लिए ड्रेस कोड है तो शिक्षकों के लिए क्यों नहीं. इससे विद्यालय का माहौल और बेहतर होगा.

परिचर्चा में शामिल सभी वक्ताओं का मत लगभग एक जैसा रहा कि ड्रेस कोड शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, मर्यादा और आदर्श वातावरण बनाये रखने का एक महत्वपूर्ण साधन है. यह केवल औपचारिक नियम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और विद्यालय की गरिमा से जुड़ा हुआ विषय है. समाज, विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग को मिलकर इसे पुनः सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है.

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By Akarsh aniket

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