कुटवां गांव में रामनवमी और सरहुल के अवसर पर आयोजित डोल जतरा ने पूरे इलाके को भक्तिमय और उत्सवी रंग में रंग दिया. हनुमान मंदिर प्रांगण में हुए इस आयोजन में आस्था, लोक संस्कृति और सामुदायिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला. सुबह से ही गांव में मेले जैसा माहौल रहा, जो देर रात तक उत्साह के साथ जारी रहा. कार्यक्रम का शुभारंभ जयसवाल समाज के जिला अध्यक्ष दिलीप जायसवाल द्वारा फीता काटकर किया गया. ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर खोड़हा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां शुरू हुईं. दूर-दराज के गांवों से पहुंचे नृत्य दल रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे हुए थे और उनकी ऊर्जा व तालमेल ने दर्शकों का दिल जीत लिया. हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही. खोड़हा नृत्य दलों के बीच मैत्रीपूर्ण प्रतिस्पर्धा ने आयोजन को और भी रोचक बना दिया. उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दलों को कुर्सी, दरी और बर्तन जैसे उपयोगी उपहार देकर सम्मानित किया गया.
आयोजकों ने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल प्रतिभाओं को मंच देते हैं बल्कि हमारी लोक परंपराओं को जीवित रखने का भी कार्य करते हैं. इस आयोजन की सफलता के पीछे गांव के युवाओं और समाजसेवियों की अहम भूमिका रही. डोल जतरा और आदिवासी नृत्य इस आयोजन के मुख्य आकर्षण रहे. इन्हें देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे.
