KYC अपडेट के नाम पर साइबर ठगी, बैंककर्मी बनकर महिला से ठगे 50 हजार

गुमला में केवाईसी अपडेट के नाम पर साइबर ठगों ने महिला के खाते से 50 हजार रुपये उड़ाए. पुलिस मामले की जांच में जुटी, ओटीपी साझा न करने की सलाह दी.

गुमलाः साइबर ठगों ने बैंककर्मी बनकर बेहरा टोली निवासी एक महिला को ठगी का शिकार बना लिया. ठगों ने खाता बंद होने का डर दिखाकर और केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर महिला का भरोसा जीता. इसके बाद ओटीपी हासिल कर उसके बैंक खाते से 50 हजार रुपये की अवैध निकासी कर ली.

केवाईसी के नाम पर मांगा ओटीपी

पीड़ित महिला के अनुसार, शुक्रवार की शाम उसके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया. कॉल करने वाले ने खुद को बैंककर्मी बताते हुए कहा कि उसके खाते का केवाईसी अपडेट नहीं है. उसने तत्काल ऑनलाइन केवाईसी नहीं कराने पर खाता बंद होने की बात कही. खाता बंद होने के डर से महिला उसके झांसे में आ गई.

इसी दौरान ठग ने ऑनलाइन केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर महिला के मोबाइल पर आए ओटीपी की जानकारी मांगी. महिला ने अनजाने में ओटीपी ठग को बता दिया. ओटीपी मिलते ही ठग ने उसके बैंक खाते से 50 हजार रुपए निकाल लिए.

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पैसे कटने का संदेश आया, तब हुआ ठगी का एहसास

खाते से रकम निकलने का मोबाइल पर संदेश आते ही महिला को साइबर ठगी का एहसास हुआ. इसके बाद उसने तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई. साथ ही गुमला थाना में लिखित आवेदन देकर मामले में कार्रवाई करने और ठगी की रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई.

मोबाइल नंबर और लेनदेन की जांच

पुलिस ने महिला के लिखित आवेदन के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस संबंधित मोबाइल नंबर और बैंक खाते में हुए लेनदेन के विवरण की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.

ओटीपी या गोपनीय जानकारी साझा न करें

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि बैंककर्मी बनकर फोन करने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड, एटीएम या बैंक खाते से जुड़ी कोई भी गोपनीय जानकारी साझा न करें. बैंक संबंधी किसी भी जानकारी के लिए आधिकारिक माध्यम से ही संपर्क करें.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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