कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा! जर्जर छत के नीचे पढ़ रहे 90 बच्चे, विभाग बेखबर

डुमरी के कंदापाठ स्कूल की छत जर्जर होने से 90 बच्चों की जान खतरे में है. शिक्षकों की कमी और भवन की बदहाली से अभिभावकों में भारी आक्रोश है.

डुमरी. डुमरी प्रखंड के राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय कंदापाठ में जर्जर छत के नीचे करीब 90 बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं. विद्यालय भवन की छत कई जगहों से पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. बरसात में छत से पानी टपकता है. इससे बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है. स्कूल प्रबंधन को कभी भी बड़े हादसे की आशंका है.

आठ कमरों में पढ़ते हैं कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चे

विद्यालय में कक्षा एक से आठवीं तक की पढ़ाई होती है. भवन करीब 20 वर्ष पहले बना था और इसमें कुल आठ कमरे हैं. बच्चों को अलग-अलग कक्षाओं में बैठाकर पढ़ाने की व्यवस्था है. लेकिन कई कमरों की छत जर्जर होने के कारण उनका उपयोग करना जोखिम भरा बना हुआ है.

90 बच्चों के लिए सिर्फ दो शिक्षक

प्रधानाध्यापक निर्मल असुर ने बताया कि विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की भारी कमी है. वर्तमान में मात्र दो शिक्षक कार्यरत हैं. सीमित संसाधनों के बीच किसी तरह व्यवस्था बनाकर सभी कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई करायी जा रही है.

विभाग को जानकारी, फिर भी नहीं हुई मरम्मत

प्रधानाध्यापक के अनुसार, विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी डुमरी बीडीओ और शिक्षा विभाग के जेई को दी गयी है. जेई ने विद्यालय भवन का जायजा लेकर आवश्यक मरम्मत कराने का आश्वासन भी दिया था. इसके बावजूद अब तक छत की मरम्मत नहीं हो सकी है.

घेराबंदी और सड़क की हालत भी खराब

विद्यालय भवन की घेराबंदी भी नहीं है. फिलहाल जाली तार से घेराबंदी का काम चलाया जा रहा है, जिससे सुरक्षा संबंधी समस्या बनी हुई है. विद्यालय तक पहुंचने वाली सड़क भी जर्जर अवस्था में है. इससे विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों में नाराजगी है.

तत्काल मरम्मत और शिक्षकों की नियुक्ति की मांग

प्रबंधन समिति और अभिभावकों ने विभागीय अधिकारियों से जर्जर छत की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है. इसके अलावा विद्यालय भवन की घेराबंदी कराने और विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की गयी है, ताकि बच्चों की पढ़ाई सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित हो सके.


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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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