शहीद नायमन के गांव में बन रही घटिया सड़क, सुधार नहीं होने पर ग्रामीणों ने विरोध की दी चेतावनी

दुर्जय पासवान, गुमला चैनपुर प्रखंड के वीर सपूत शहीद नायमन कुजूर के गांव में घटिया सड़क का निर्माण कराया जा रहा है. यह शिकायत गांव के लोगों ने की है. ग्रामीणों ने कहा है कि सड़क कि जो गुणवत्ता होनी चाहिए. वह नहीं है. यह सड़क कभी भी बनने के बाद उखड़ सकती है. ग्रामीणों […]

दुर्जय पासवान, गुमला

चैनपुर प्रखंड के वीर सपूत शहीद नायमन कुजूर के गांव में घटिया सड़क का निर्माण कराया जा रहा है. यह शिकायत गांव के लोगों ने की है. ग्रामीणों ने कहा है कि सड़क कि जो गुणवत्ता होनी चाहिए. वह नहीं है. यह सड़क कभी भी बनने के बाद उखड़ सकती है. ग्रामीणों ने प्रशासन व संवेदक को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर काम की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता है तो मजबूरन सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होना होगा.

यहां बता दें कि कुरूमगढ़ से लेकर शहीद के गांव उरू बारडीह होते हुए सोकराहातू तक पक्की सड़क का निर्माण हो रहा है. करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने सवाल खड़ा किया है. साथ ही इसकी शिकायत ग्रामीणों ने लिखित रूप से गुमला डीसी से भी की है. जिसमें सड़क की गुणवत्ता में सुधार करने की मांग की गयी है.

युवा नेता रोहित भगत ने कहा है कि आंदोलन के बाद शहीद के गांव में सड़क बन रही है. लेकिन संवेदक द्वारा घटिया काम कराया जा रहा है. सड़क के काम में सुधार हो, नहीं तो मजबूरन हमें सड़क पर उतरकर जाम करना होगा. पथ निर्माण विभाग द्वारा बन रहे शहीद नयमन कुजूर पथ कुरूमगढ़ से करमटोली तक के निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती गयी है. पथ निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है. जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है.

चूंकि यह पथ विगत दो दशक के बाद बन रहा है. इतने दिनों तक यहां के लोग इस जर्जर पथ का दंश झेल चुके हैं. अब यह नहीं चाहते हैं कि इनकी आने वाली पीढ़ी भी यह दंश झेले. बिहारी खेरवार ने कहा कि प्रशासन एक बार सड़क व पुलिया की जांच करे. किस प्रकार निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है. ग्रामीण रामा खेरवार ने कहा कि हमलोग चाहते हैं कि मजबूत सड़क बने. लेकिन कुछ लोग अपने लाभ के लिए गलत काम कर रहे हैं. प्रशासन इसपर सुधार करे.

ग्रामीण बितवा साय ने कहा कि काम में सुधार हो. बारडीह के पंचायत समिति सदस्य सुकरू उरांव ने कहा कि सड़क बार-बार नहीं बनती है. जब दो दशक के बाद सड़क बन रही है तो उसकी गुणवत्ता ठीक होनी चाहिए. ताकि लोग सड़क पर कम से कम पांच छह साल आराम से चल सकें. ऐसी सड़क न बने कि एक साल भी नहीं चल सके.

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