लौहांडिया पुनर्वास स्थल के बड़ा भोराय गांव में बुधवार को पारंपरिक चरक मेला का भव्य आयोजन किया गया. मेले में आदिवासी समुदाय के लोगों ने अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की. इस अवसर पर गुरु बाबा ने आदिवासी परंपरा के अनुसार विधिवत पूजा-अर्चना की तथा खूंटा के सहारे पारंपरिक परिक्रमा की रस्म निभायी. उन्होंने बताया कि चरक मेला आदिवासी समाज का एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व है. इस पर्व की शुरुआत 5 जून से हुई थी, जिसका समापन बुधवार को मेले के आयोजन के साथ संपन्न हुआ. उन्होंने कहा कि इस पर्व के माध्यम से क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि बनाये रखने की प्रार्थना की जाती है. साथ ही नई फसल के आगमन की खुशी में भी यह उत्सव मनाया जाता है. पर्व के दौरान प्रकृति की पूजा कर उसके प्रति आभार भी व्यक्त किया जाता है. मुखिया प्रतिनिधि सांझला हांसदा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष ग्रामीणों के सहयोग से चरक मेले का आयोजन किया जाता है. मेले में दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर उत्सव का आनंद लेते हैं. उन्होंने बताया कि मेले के सफल संचालन एवं सुरक्षा व्यवस्था के लिए मेला समिति के सदस्य लगातार निगरानी करते रहे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. मेले के दौरान आयोजित संथाली ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा. सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेने के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित हुए. कार्यक्रम में उपस्थित सीओ केदार नाथ सिंह ने कहा कि चरक मेला आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का जीवंत उदाहरण है. मेले में आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सुंदर झलक देखने को मिली. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखना चाहिए, क्योंकि यही उनकी वास्तविक पहचान है. मौके पर सीआई पंकज सिंह, राजस्व कर्मचारी गजेंद्र बास्की, नीतलाल सोरेन, प्रमोद हेंब्रम, महेंद्र हेंब्रम, संतोष किस्कू, जीतराम मुर्मू, राजेंद्र मरांडी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे.
बड़ा भोराय गांव में धूमधाम से आयोजित हुआ चरक मेला
आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ हुआ पूजा-अर्चना का आयोजन
