झाेपड़ी के घर में जिंदगी काट रहा मछुआरा का परिवार
बेसहारा परिवार को कब तक मिलेगा योजनाओं का लाभ
गोड्डा : मारखन पंचायत के मोहनपुर गांव के आदिवासी टोला की मरांगमय हांसदा की जिंदगी में एक नया मोड़ आ गया है.मछुआरे पति उमेश मुर्मू के मृत्यु के बाद जब उसने घर में खोजबीन की तो उसके परिवार का नाम बीपीएल मेें शामिल होने की बात सामने आयी. मृतक उमेश मुर्मू के पिता स्व. संझला मुर्मू के नाम से बने बीपीएल नंबर-12568 है. तो फिर क्यों बीपीएल परिवार होने के बावजूद आज तक इस परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है. ये सिस्टम के समक्ष सवाल खड़ा कर रहा है.
मरांगमय अपने चार बच्चों के साथ जिस मकान में रह रही है वो झापड़ीनुमा है. बारिश में घर में पानी का रिसाव होता है. रात में बारिश हुई तो मरांगमय को रतजग्गा कर रात काटना पड़ता है. सरकार की ओर से गरीब परिवारों के लिए इंदिरा आवास, प्रधानमंत्री आवास जैसी कई कारगार योजनाएं चलायी जा रही है.
इसके बाद भी गरीब परिवार को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित होना पड़ रहा है. यहां तक के पीएम के स्वच्छ भारत के सपने भी मरांगमय के द्वार तक नहीं पहुंच पा रहा है. मरांगमय के घर में शौचालय नहीं है. योजनाओं को गति दिलाने के जिले के कलक्टर लगातार बैठक कर समीक्षा कर रहे हैं.
बेहतर पोषण के अभाव में मरांगमय के दो बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं. पिछले दिनों मरांगमय की ओर से एक आवेदन भी उपायुक्त कार्यालय में दिया गया है. आवेदन में मरांगमय की दयनीय स्थिति से अवगत कराया गया है. अब देखने वाली बात होगी कि सिस्टम की ओर से कब तक मरांगमय के मामले में अग्रेतर कारवाही कर सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाता है.
सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अंचल स्तर पर पहल किया गया है. अगर अंचल की ओर से कोताही बरती गयी, तो मामले को उपायुक्त तक ले जाया जायेगा. आवास योजना व शौचालय का लाभ इस परिवार को मिलना जरूरी है.”
– दिनेश प्रसाद यादव, मुखिया, मारखन पंचायत.
