गोड्डा के हरिदेवी रेफरी अस्पताल में सुविधाओं का अभाव प्रतिनिधि, ठाकुरगंगटी गोड्डा जिले के अंतिम छोर पर स्थित हरिदेवी रेफरल अस्पताल आज भी विकास की बाट जोह रहा है. सुदूरवर्ती इलाके में यह मात्र एक अस्पताल है, जहां सुविधाओं का घनघोर अभाव है. स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को संपूर्ण इलाज नहीं मिल पाता और उन्हें अन्य स्थानों का सहारा लेना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर बड़ी इमारतें तैयार करती है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सके. लेकिन सुविधाओं के अभाव में लोग लंबे खर्च का शिकार हो रहे हैं. अस्पताल में कर्मचारियों की कमी, सरकारी वाहन और आवास की अनुपलब्धता से मरीजों और कर्मियों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी ठाकुरगंगटी के हरिदेवी रेफरल अस्पताल में 30 शैय्या की व्यवस्था है, लेकिन चिकित्सकों का अभाव स्पष्ट दिखाई देता है. पांच की जगह मात्र चार चिकित्सक कार्यरत हैं और महिला चिकित्सक का पद वर्षों से रिक्त पड़ा है. चार एएनएम का पद भी खाली है, जिससे रोगियों को काफी परेशानी होती है. वैक्सीन कर्मी का अभाव भी गंभीर समस्या है. प्राइवेट में महंगी दर पर कराना पड़ रहा एक्सरे : अस्पताल में एक्सरे की सुविधा उपलब्ध नहीं है. यदि किसी रोगी को जांच की आवश्यकता होती है तो उन्हें बाहर जाकर महंगे पैसे खर्च कर जांच करवानी पड़ती है. गंभीर स्थिति में रोगियों को केवल प्राथमिक उपचार देकर सीधे बाहर रेफर कर दिया जाता है. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि ड्रेसर की कमी से रोगियों को भारी परेशानी होती है. कार्यरत ड्रेसर को गोड्डा सीएस द्वारा गोड्डा में पदस्थापित कर दिया गया, जिससे यहां ड्रेसिंग का कार्य ठप हो गया है. सड़क दुर्घटना जैसी स्थिति में रोगियों का प्राथमिक उपचार भी नहीं हो पाता.
अस्पताल में एक्सरे और वैक्सीन कर्मियों की कमी, महिला चिकित्सक नहीं
गोड्डा जिले के हरिदेवी रेफरल अस्पताल में सुविधाओं की भारी कमी है, जिससे ग्रामीणों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा। 30 शैय्याओं वाले इस अस्पताल में चिकित्सकों, एएनएम और वैक्सीन कर्मी की संख्या कम है। महिला चिकित्सक का पद कई सालों से खाली है। एक्सरे सुविधा नहीं होने से मरीजों को बाहर महंगे दामों पर जांच करवानी पड़ती है। सरकारी वाहन और आवास की कमी से कर्मचारियों और मरीजों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ड्रेसर की कमी के कारण प्राथमिक उपचार प्रभावित हुआ है, खासकर सड़क दुर्घटना जैसे मामलों में। स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि विकास के लिए भले बड़ी इमारतें बन रही हों, लेकिन असली सुविधा न मिलने से वे लंबे खर्च में फंसे हैं।
