पीरटांड़ प्रखंड की कुम्हरलालो और पालगंज पंचायत के विभिन्न गांवों में इन दिनों हाथियों का उत्पात लगातार जारी है. करीब 30 हाथियों के झुंड के बार-बार गांवों में प्रवेश करने से ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल है. दिन के समय हाथियों का झुंड जंगल की ओर चला जाता है, लेकिन शाम ढलते ही किसी न किसी गांव, टोले या मोहल्ले में पहुंचकर उत्पात मचाने लगता है. इससे ग्रामीणों की रात दहशत के साये में गुजर रही है.
तीन-चार समूहों में बंट जाता है हाथियों का झुंड
ग्रामीणों के अनुसार, बड़ी संख्या में हाथियों के गांवों के आसपास पहुंचने के बाद झुंड तीन-चार समूहों में बंट जाता है. अलग-अलग दिशाओं में हाथियों के चले जाने से वन विभाग की टीम को भी उन्हें खदेड़ने में परेशानी हो रही है. एक स्थान से हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने के बाद दूसरे इलाके में उनके पहुंचने की सूचना मिल जाती है. इसके बाद टीम को वहां पहुंचना पड़ता है.
ये भी पढ़ें: गांडेय में पलाश के जंगल में अधेड़ महिला का शव मिला, पहचान में जुटी पुलिस
सुबह से ही रात की तैयारी में जुट जाते हैं ग्रामीण
हाथियों के लगातार उत्पात का असर ग्रामीणों की दिनचर्या पर भी पड़ा है. सुबह होते ही ग्रामीण रात के लिए लुक यानी मशाल तैयार करने, पटाखों की व्यवस्था करने और टॉर्च समेत रोशनी के अन्य साधन जुटाने में लग जाते हैं.
ग्रामीणों को हर समय यह चिंता सताती रहती है कि रात में हाथियों का झुंड कब और किस टोले में पहुंच जाये. शाम होते ही लोग अपने घरों के आसपास सतर्क हो जाते हैं. हाथियों के डर से कई लोग रात में घर से बाहर निकलने से भी परहेज कर रहे हैं.
धान की फसल रौंदकर गांवों की ओर बढ़ रहा झुंड
हाथियों के गांवों में पहुंचने से पहले खेतों में लगी धान की फसल को नुकसान हो रहा है. ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों का झुंड खेतों में लगी धान की फसल को रौंदते हुए गांवों की ओर बढ़ता है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
खेती पर निर्भर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गयी है. उनका कहना है कि यदि हाथियों का विचरण इसी तरह जारी रहा तो धान की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है.
वर्षों से गुजरता रहा है हाथियों का झुंड, इस बार लगातार ठहराव से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों के अनुसार, पीरटांड़ के इन इलाकों से हाथियों का झुंड वर्षों से गुजरता रहा है. आमतौर पर कुछ समय बाद हाथी दूसरे जंगलों की ओर चले जाते थे, लेकिन इस बार हाथियों का झुंड लंबे समय से कुम्हरलालो और पालगंज पंचायत के आसपास ही विचरण कर रहा है.
हाथियों के लगातार क्षेत्र में बने रहने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गयी है. रात में हाथियों के गांवों में प्रवेश की आशंका के कारण लोग शाम के बाद विशेष सतर्कता बरत रहे हैं.
पहले भी हाथियों के हमले में जा चुकी है लोगों की जान
पीरटांड़ क्षेत्र में हाथियों और ग्रामीणों के बीच संघर्ष कोई नयी बात नहीं है. ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में हाथियों के हमले में क्षेत्र के कई लोगों की जान जा चुकी है. इसके बावजूद हाथियों के लगातार विचरण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है.
ये भी पढ़ें: बगोदर के घाघरा गांव में लूट, हथियार का भय दिखाकर परिवार को बनाया बंधक; लाखों की लूट
ग्रामीणों का कहना है कि केवल हाथियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर खदेड़ने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. हाथियों के लगातार विचरण वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर वन विभाग को ठोस योजना तैयार करनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों और हाथियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से हाथियों के उत्पात से निजात दिलाने, फसल क्षति का उचित मुआवजा देने और हाथियों के गांवों में प्रवेश को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है.
