पीरटांड़. जंगल से भटककर गांव में पहुंचे एक नीलगाय का बच्चा शुक्रवार को झरहा गांव पहुंच गया. ग्रामीणों ने बच्चे को पकड़ कर वन विभाग को सौंप दिया. वन विभाग नीलगाय के बच्चे को पारसनाथ पहाड़ स्थित गंधर्वनाला के पास छोड़ दिया. इस नेक कार्य के लिए वन विभाग ने ग्रामीणों को सम्मानित भी किया.
जंगल व जानवर की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी : डीएफओ
डीएफओ ने कहा कि जंगलों और जंगली पशुओं की सुरक्षा हमारा कर्तव्य है. नीलगाय के बच्चे को बचाकर ग्रामीणों ने बड़ा नेक काम किया है. इसलिए वन विभाग ग्रामीणों का आभारी है. कहा कि वनों की सुरक्षा के लिए जो भी जरूरत हो विभाग उसे उपलब्ध करायेगा. बताया गया कि गुरुवार शाम को पशुओं को चराने के क्रम में ग्रामीणों को नीलगाय का बच्चा दिखायी दिया. एक अजीब जानवर देखकर लोग डर गए और शोर मचाने लगे. इसके बाद वह बच्चा कहीं भाग गया. बाद में उसका बच्चा अन्य घरेलू पशुओं के साथ जंगल से बाहर आ गया. इसके बाद ग्रामीणों ने उसे पकड़कर अपने साथ रखा. इसकी सूचना वन विभाग को दी. इसी सूचना पर नीलगाय के बच्चे को बरामद कर वन विभाग ने पारसनाथ पहाड़ पर छोड़ दिया.
वन्य प्राणी आश्रय स्थल है पारसनाथ
बता दें कि पारसनाथ पहाड़ वन्य प्राणी आश्रय स्थल है. यहां सैकड़ों प्रजाति के वन्य प्राणी रहते हैं. जंगल से भटक कर जानवार ग्रामीण इलाकों में चले जाते हैं. ग्रामीणों ने डीएफओ से हाथियों से बचाव की व्यवस्था की मांग की. डीएफओ ने लोगो को टॉर्च और सोलर लाइट देने का आश्वासन दिया. मौके पर मंगू किस्कू, वन विभाग से रोहित पानूरी, सूरज चौधरी, अन्नू सोरेन, अमर विश्वकर्मा, बीरेंद्र कुमार सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
