गिरिडीह. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अब नये समीकरण बनने लगे हैं. आने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलकों में संभावित प्रत्याशी के नामों पर चर्चा शुरू हो गयी है. इसी बीच दिवंगत मंत्री की पत्नी श्वेता शर्मा को झामुमो की ओर से चुनाव मैदान में उतारे जाने की अटकलें तेज हो गयी हैं.
हालांकि, श्वेता शर्मा को प्रत्याशी बनाये जाने को लेकर झामुमो की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गयी है. ऐसे में उनके नाम की चर्चा को फिलहाल राजनीतिक अटकलें के तौर पर ही देखा जा रहा है.
परिवार के चेहरे को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा
सुदिव्य कुमार सोनू लंबे समय से गिरिडीह की राजनीति में सक्रिय थे और क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती थी. उनके निधन के बाद झामुमो के सामने अब संगठन और उनके राजनीतिक प्रभाव को आगे बढ़ाने की चुनौती है.
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी इस चुनौती से निबटने के लिए परिवार के ही किसी सदस्य को चुनाव मैदान में उतारने के विकल्प पर विचार कर सकती है. इसी क्रम में श्वेता शर्मा का नाम सामने आ रहा है.
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श्वेता शर्मा दिवंगत मंत्री के राजनीतिक और सामाजिक जीवन की गतिविधियों से परिचित रही हैं. ऐसे में समर्थकों के बीच उनकी स्वीकार्यता और दिवंगत मंत्री के प्रति सहानुभूति को संभावित चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
श्वेता शर्मा की उम्मीदवारी पर क्या हो सकता है असर?
वहीं, अगर झामुमो श्वेता शर्मा को प्रत्याशी के रूप में चुनती है, तो चुनाव में दिवंगत मंत्री की राजनीतिक विरासत और उनके समर्थकों की भावनाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं. हालांकि, चुनावी मैदान में उतरने के बाद स्थानीय संगठन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और विपक्षी दलों की रणनीति भी परिणाम को प्रभावित करेगी.
श्वेता शर्मा की शैक्षणिक योग्यता इंटरमीडिएट साइंस बतायी गयी है. फिलहाल उनके चुनाव लड़ने को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है.
हाजी हुसैन और जगरनाथ महतो के परिवार को भी मिला था मौका
झामुमो के भीतर दिवंगत नेताओं के परिवार के सदस्यों को राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने का उदाहरण पहले भी देखने को मिला है.
पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद उनके बेटे हफीजुल हसन को झामुमो ने मधुपुर विधानसभा उपचुनाव में मैदान में उतारा था. उपचुनाव से पहले उन्हें मंत्री पद की शपथ भी दिलायी गयी थी. इसके बाद उन्होंने चुनाव जीतकर अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया.
इसी तरह पूर्व मंत्री जगरनाथ महतो के निधन के बाद उनकी पत्नी बेबी देवी को झामुमो ने डुमरी विधानसभा उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया था. उपचुनाव से पहले उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी भी दी गयी थी. इसके बाद बेबी देवी ने चुनाव में जीत हासिल की थी.
गिरिडीह में भी दोहरायेगा झामुमो पुराना फार्मूला?
इन दोनों उदाहरणों के कारण गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव को लेकर श्वेता शर्मा के नाम की चर्चा को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि झामुमो गिरिडीह में भी परिवार के सदस्य को ही प्रत्याशी बनायेगा.
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फिलहाल पार्टी की ओर से प्रत्याशी को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है. यदि श्वेता शर्मा को उम्मीदवार बनाया जाता है, तो गिरिडीह उपचुनाव में दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक विरासत, सहानुभूति और उनके समर्थकों की भूमिका चुनावी मुकाबले का अहम हिस्सा बन सकती है.
