मौके पर पैनल अधिवक्ता ने कहा कि कानूनी समस्याओं के समाधान के लिए दी जाने वाली सेवा अथवा सहायता को विधिक सेवा कहा जाता है. इसके तहत कानूनी जागरूकता फैलाना, छोटे छोटे विवादों का समाधान करना, लोगों को जागरूक करना तथा कानूनी सहायता प्रदान करना है. उन्होंने बाल विवाह पर कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत 21 वर्ष से कम आयु के बालक तथा 18 वर्ष से कम आयु की बालिका का विवाह वर्जित माना गया है. अगर ऐसा विवाह संपन्न भी हुआ तो वह शून्यकरणीय होगा. अवयस्क बालक या बालिका अपने अभिभावक या व्यस्क मित्र की मदद से ऐसे विवाह को रद्द करने के लिए परिवार न्यायालय या सक्षम न्यायालय में मुकदमा दायर कर सकेगा. व्यस्क होने के दो वर्षों के भीतर ऐसे विवाह को शून्य घोषित करने के लिए मुकदमा दायर किया जा सकता है. इस दौरान पीएलवी बासुदेव पंडित ने स्पांशरसिप योजना की जानकारी दी. कहा कि अनाथ एवं असहाय बच्चों के आर्थिक सहयोग के लिए इस योजना के तहत 4000 रुपये मासिक सहयोग राशि प्रदान की जाती है. उन्होंने कहा कि आज भी सैकड़ों वैसे अनाथ एवं असहाय बच्चे हैं जो दूसरे के भरोसे अपना जीवन गुजार रहे हैं. वैसे बच्चों को सहयोग प्रदान करने के लिए स्पांशरसिप योजना के तहत चार हजार रुपए मासिक सहयोग दिया जाता है. इस दौरान उन्होंने नशा मुक्ति पर लोगों को जागृत किया. उन्होंने 8 अप्रैल को गिरिडीह व्यवहार न्यायालय में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी दी. कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में बिजली, उत्पाद, वन समेत अन्य वाद में आपसी समझौते के आधार पर मुकदमा समाप्त कराने के लिए आवेदन करें. मौके पर पीएलवी आनन्द पंडित समेत अन्य लोग उपस्थित थे.
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