बता दें कि कि उक्त भवन का अब सिर्फ एक निर्माणाधीन ढांचा नहीं, बल्कि व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन चुका है. एक दशक पहले भवन निर्माण के लिए आवंटित 21.40 लाख रुपये की निकासी कर ली गयी है, लेकिन आज तक भवन का निर्माण पूरा नहीं हुआ है. इसकी शिकायत ग्रामीण कई बार जिला प्रशासन से लिखित कर चुके हैं, मामला भी लगातार मीडिया की सुर्खियां बन रहा. बावजूद इसके शिक्षा विभाग चुप रहा. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विद्यालय कक्षा एक से लेकर आठ तक के लिए है. इसको ध्यान में रखकर यहां बिल्डिंग का आवंटन हुआ था, लेकिन वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया. यहां आठ कक्षाओं के लगभग 175 बच्चे जर्जर कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं. इतना ही नहीं भवन के अभाव में एक ही कमरे में 2-3 कक्षाओं का संचालन हो रहा है.
जांच के बाद की जायेगी कार्रवाई
बीइइओ रंजीत चौधरी ने कहा कि जांच के लिए टीम का गठन किया किया जा रहा है. मामले की जांच करवाकर उचित करवाई की जायेगी. किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. इधर, डीएसई से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.
