कर्बला व दरगाह में मांगते हैं मन्नत, पूर्ण होने पर चढ़ाते हैं सिरनी
महिलाएं धोती हैं मोहम्मदिया निसान के पैर, देती है अक्षत
गांव में ईद हो या दीपावली, दुर्गा पूजा हो या मुहर्रम, अधिकांश त्योहारों में हिंदू-मुस्लिम एक मंच पर होते हैं. हम बात कर रहे हैं गांडेय प्रखंड के बड़कीटांड़ गांव की, जहां मुहर्रम में हिंदू परिवार भी हजरत हुसैन का सदका करते हैं. मुहर्रम आते ही मुस्लिम के साथ-साथ हिंदू परिवार भी अपने स्तर से तैयारी करते हैं. हिंदू बड़कीटांड़ स्थित इमामबाड़े व महेशमुंडा कर्बला में मन्नत मांगते हैं और मुराद पूर्ण होने पर सिरनी चढ़ाते हैं. इतना ही नहीं मुहर्रम की दसवीं को जुलूस के दौरान हिंदू महिलाएं मोहम्मदिया निसान के पैर धोती हैं और अरवा चावल, गुड़, धूप, अगरबत्ती लेकर फातिहा कराती हैं. निसान को अक्षत देती हैं. गांव के भागीरथ सिंह, शिवनारायण सिंह, प्यारी सिंह, चंद्रमणि सिंह, रहमान मियां, रज्जाक अंसारी आदि ने बताया कि बुजुर्गों की परंपरा को कायम रखना जरूरी है. हम यहां हर जाति-धर्म का शुरू से सम्मान करते आ रहे हैं. इससे धर्म की रक्षा के साथ सांप्रदायिक सौहार्द भी कायम रहता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
