Giridih News: जहां एक ओर पूरा विश्व अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति का सम्मान कर रहा था, वहीं गिरिडीह जिले की सैकड़ों जल सहिया अपने हक और सम्मान के लिए सड़क पर उतरी हुई थीं. बकाया मानदेय के भुगतान की मांग को लेकर जिले के सभी 13 प्रखंडों से आयी जल सहियाओं ने उपायुक्त कार्यालय और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया. जलसहियाओं ने बताया कि जब वे अपनी पीड़ा लेकर डीसी ऑफिस पहुंची तो डीसी रामनिवास यादव ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें डांट-फटकार लगायी. महिलाओं ने इसे महिला दिवस पर महिला शक्ति का अपमान बताया. इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है. अब पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने गिरिडीह डीसी से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है. मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन से तत्काल जल सहियाओं के बकाया मानदेय का भुगतान करने की भी मांग की है.
बाबूलाल ने घटना को बताया महिलाओं का अपमान
बाबूलाल ने एक्स पर लिखा, ‘झारखंड की ग्रामीण व्यवस्था और ‘नल से जल’ योजना की असली नायक हमारी ‘जल सहिया’ बहनें हैं, जो जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन से लेकर जल गुणवत्ता जांच और स्वच्छता सुनिश्चित करने तक का कठिन कार्य पूरी निष्ठा से करती हैं. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि 8 मार्च, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जब पूरा देश नारी शक्ति का वंदन कर रहा था, तब गिरिडीह में अपनी वाजिब मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रही इन बहनों को जिले के डीसी की डांट-डपट और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा.
गिरिडीह डीसी को बताया भ्रष्टाचारी
डीसी रामनिवास यादव पर बड़ा आरोप लगाते हुए बाबूलाल ने आगे कहा, ‘साहिबगंज के लोग बताते हैं कि इस अधिकारी का महिलाओं के प्रति नजरिया और आचरण पहले भी ठीक नहीं रहा है और अब गिरिडीह में सात महीने से मानदेय के लिए तरस रही बहनों का अपमान कर इन्होंने अपनी उसी मानसिकता का परिचय दिया है. शायद साहिबगंज में रहने के दौरान अवैध पत्थर खनन के माध्यम से करोड़ों की काली कमाई करने वाले ऐसे अधिकारियों को अब वेतन की कीमत समझ नहीं आती, इसलिए वे इन गरीब महिलाओं की मजबूरी का मजाक उड़ा रहे हैं. जिले का मालिक बनने की गलतफहमी पालने वाले अफसरों को यह याद रखना चाहिए कि वे जनता के ‘सेवक’ हैं, ‘शासक’ नहीं.’
हेमंत सोरेन से की यह मांग
बाबूलाल ने सीएम हेमंत से मांग करते हुए लिखा, ‘मुख्यमंत्री आपके पास अपने लिए 100 करोड़ के शीशमहल और ढाई करोड़ की लैंड क्रूजर के लिए तो फंड है, फिर इन बहनों के हक का पैसा देने में क्या बाधा आ रही है? जिस विभाग में क्लर्क से लेकर मंत्री तक करोड़ों डकार रहे हों, वहां जल सहियाओं का वेतन रोकना पाप है. हमारी मांग है कि मुख्यमंत्री इस मामले का संज्ञान लेकर तत्काल भुगतान सुनिश्चित करें और यह अहंकारी अधिकारी इन महिलाओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, ताकि भविष्य में कोई भी अफसर इस तरह के दुर्व्यवहार की हिम्मत न कर सके.
अरेस्ट कराने की दी गयी धमकी : अशोक कुमार सिंह
जलसहिया संघ के मुख्य संरक्षक अशोक कुमार सिंह ने प्रशासन के रवैये पर खेद प्रकट किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को सम्मानित करने की जगह उन्हें अरेस्ट करने और नौकरी से हटाने की धमकी दी गयी. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि सात दिनों में बकाया मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं होता है, तो जिलास्तर पर बैठक कर आगे की रणनीति बनायी जायेगी. अगले चरण में उपायुक्त कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा. मामले की शिकायत राज्य के नगर विकास और आवास मंत्री से कर सच्चाई उजागर करने की मांग की जायेगी. आंदोलन का नेतृत्व राज्य अध्यक्ष सितारा परवीन, सरिता देवी और दिव्या देवी कर रहीं थीं. इस दौरान जिले के सभी प्रखंडों से आयीं सैकड़ों जलसहिया उपस्थित थीं.
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