Giridih News: रंगदारी मांगने और कारखाना का काम बाधित करने का आरोप

Giridih News: मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मंझिलाडीह स्थित बालमुकुंद स्पंज एंड आयरन प्राइवेट लिमिटेड कारखाना में असामाजिक तत्वों द्वारा कामकाज बाधित करने और रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है. इस संबंध में कारखाना प्रबंधन ने तीन नामजद समेत 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है.

कारखाना प्रभारी परशुराम तिवारी ने कहा है कि 27 जनवरी की सुबह करीब छह बजे कन्हाई पांडेय, केदार राय और सनातन साहू के नेतृत्व में 25-30 की संख्या में असामाजिक तत्व कारखाना के मुख्य गेट को बिना किसी पूर्व सूचना के गेट को जाम कर दिया. इस दौरान श्रमिकों को अंदर आने से रोका गया. कच्चा माल लेकर आये ट्रकों को भी प्रवेश नहीं करने दिया. गेट जाम होने के कारण गिरिडीह-टुंडी-धनबाद मुख्य सड़क पर ट्रकों की लंबी कतार लग गई, जिससे आम लोगों को भी आवागमन में परेशानी हुई. आरोप है कि असामाजिक तत्वों ने कंपनी के सुरक्षा प्रभारी गोपाल सिंह को डंडा दिखाकर धमकाया और कहा कि जब तक कंपनी मालिक से रंगदारी नहीं दिलायी जाती, तब तक गेट नहीं खोला जायेगा. प्राथमिकी में यह भी उल्लेख है कि आरोपियों ने प्रतिमाह एक लाख की रंगदारी की मांग की गयी. समझाने के दौरान सुरक्षा प्रभारी गोपाल सिंह के साथ गाली-गलौज व मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी. डर के कारण गोपाल सिंह ने मौके पर दो हजार रुपये दे दिये. उनकी जेब से 5,000 भी निकाल लिये गये. इसकी सूचना पुलिस को दी गयी. पुलिस के पहुंचते ही सभी आरोपी मौके से फरार हो गये. कारखाना प्रबंधन का आरोप है कि इससे पहले भी आरोपित और उनके सहयोगी कंपनी के कर्मचारियों व ठेकेदारों को फोन कर रंगदारी की मांग और जान से मारने की धमकी देते रहे हैं, जिससे कर्मियों में भय का माहौल है और कंपनी को आर्थिक नुकसान हो रहा है. मुफस्सिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी है. आरोपियों की पहचान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.

रंगदारी व मारपीट के आरोप बेबुनियाद : कन्हाई पांडेय

मामले को लेकर कन्हाई पांडेय ने सभी आरोप पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया है. उन्होंने कहा कि ना तो रंगदारी मांगी गयी है और ना ही सड़क जाम और मारपीट. करीब दो महीने पूर्व फैक्ट्री से चार कर्मियों को बिना किसी ठोस कारण के काम से हटा दिया गया था. ये चारों कर्मी पहले कंपनी की ओर से कार्यरत थे, लेकिन बाद में उन्हें ठेकेदार के अधीन कार्य करने के लिए भेज दिया गया. इसके बाद ठेकेदार द्वारा उनकी मजदूरी में कटौती कर दी. जब कर्मियों ने इसका विरोध किया तो इसी कारण उन्हें काम से निकाल दिया गया. बताया कि इस पूरे मामले की जानकारी फैक्ट्री प्रबंधन और जिला प्रशासन को भी दी गयी थी. फैक्ट्री प्रबंधन ने 10 दिनों में निर्णय लेने का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय सीमा के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की हुई. इसके विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लेकर पूर्व में ही प्रबंधन को लिखित रूप से सूचना दी थी. 27 जनवरी को उसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन को अंजाम दिया जा रहा था, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा साजिश के तहत रंगदारी और मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए झूठी प्राथमिकी दर्ज करायी है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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Author: MAYANK TIWARI

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