गावां थाना क्षेत्र के डाबर गांव निवासी हृदय नारायण सिंह हत्याकांड में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम मनोज चंद्र झा की अदालत ने शुक्रवार को सजा के बिंदुओं पर सुनवाई करते हुए दोषी को विभिन्न धाराओं में सजा सुनायी. अदालत ने दोषी डाबर सेरूआ गांव निवासी उमेश महतो एवं महेश महतो को भादवि की धारा 302/147 में आजीवन कारावास एवं 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी है. इसके अलावा अर्थदंड की राशि का भुगतान नहीं करने पर दोनों दोषियों को दो साल अतिरिक्त कारावास का दंड भुगतना पड़ेगा. वहीं भादवि की धारा 201 में तीन साल कारावास एवं 20 हजार रुपये अर्थदंड दिया गया है. अर्थदंड की राशि का भुगतान नहीं करने पर दोषियों को एक-एक साल अतिरिक्त कारावास का दंड भुगतना पड़ेगा. यह घटना गावां थाना क्षेत्र के डाबर गांव में 13 जुलाई 1989 को घटी थी. 10 अगस्त 1989 को हृदय नारायण सिंह का शव गावां थाना क्षेत्र के कुसमाई पथलहिया माइका माइंस से बरामद किया गया था. यह मामला गावां थाना में कांड संख्या 53/1989 से संबंधित है. मामले की प्राथमिकी मृतक के पिता जोबराज सिंह की शिकायत पर दर्ज की गयी थी. प्राथमिकी में कहा गया था कि उनका बेटा हृदय नारायण सिंह, पोता बिरंची कुमार सिंह व दयानंद कुमार सिंह बरगद पेड़ वाले मकान स्थित मवेशी घर में सोने गये थे. उनके पुत्र हृदय नारायण सिंह की छोटन पासी, साधु पासी, सहदेव महतो, कांग्रेस महतो, सुंदर महतो, महेश महतो, मधुसूदन महतो, भुनेश्वर महतो, बालो महतो, साधुशरण सिंह, सीटन सिंह, मकुन देव सिंह, अंवध किशोर सिंह, उमेश महतों आदि ने गला दबाकर हत्या कर दी. उनके शव को उसी के बिछावन में लपेटकर बाहर ले गये.
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