अनूप जायसवाल, धुरकी (गढ़वा) सरकार आदिम जनजातियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं चला रही है, लेकिन इस सबके बावजूद, गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड के खाल गांव में एक दुखद घटना सामने आयी है. 55 वर्षीय बीमार धुरपतिया देवी, जो आदिम जनजाति समुदाय से थीं, शनिवार रात कड़ाके की ठंड और कंबल के अभाव में अपनी जान गंवा बैठीं. देश के 112 आकांक्षी जिलों में शामिल गढ़वा में हाल ही में नीति आयोग के अधिकारियों द्वारा विकास कार्यों का जायजा लिया गया था, लेकिन दौरे के कुछ ही दिन बाद आदिम जनजाति की महिला की ठंड से मौत ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं. धुरपतिया देवी के परिवार के अनुसार, वे लंबे समय से लकवा (पैरालिसिस) से ग्रसित थीं और परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय थी कि उनका समुचित इलाज संभव नहीं हो पा रहा था. अचानक बढ़ी ठंड और पर्याप्त संसाधनों की कमी ने धुरपतिया देवी के लिए काल का रूप ले लिया. मृतक के परिजनों ने बताया कि कंबल नहीं होने के कारण धुरपतिया देवी ठंड से प्रभावित हुईं और इस कारण उनकी मृत्यु हो गयी. मौत की खबर मिलते ही गांव के पूर्व उप प्रमुख प्रभु शंकर जायसवाल मृतक के घर पहुंचे. उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी और अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की. साथ ही, उन्होंने प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है. कंबल वितरण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अगले 5 से 7 दिनों के भीतर जिले में कंबल उपलब्ध हो जायेंगे, और इसके बाद तुरंत जरूरतमंदों के बीच उनका वितरण शुरू कर दिया जायेगा. पंकज कुमार गिरी, सहायक निदेशक (सामाजिक सुरक्षा)
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