नगर निकाय का प्रचार थमा, घर-घर जाकर जनसंपर्क तेज

राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी से बढ़ी सरगर्मी, गढ़वा में अध्यक्ष पद के 12 प्रत्याशी मैदान में

राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी से बढ़ी सरगर्मी, गढ़वा में अध्यक्ष पद के 12 प्रत्याशी मैदान में जितेंद्र सिंह गढ़वा गढ़वा नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए चुनाव प्रचार का शोर थम गया है और अब प्रत्याशी घर-घर जाकर मतदाताओं से समर्थन मांग रहे हैं. गढ़वा नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए कुल 12 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. इस चुनाव में भाजपा ने अपने समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में पूरी ताकत झोंक दी है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास तथा स्थानीय विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने गढ़वा पहुंचकर समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में जोरदार प्रचार किया. निकाय चुनाव में पहली बार राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के पहुंचने से राजनीतिक सरगर्मी चरम पर रही. वहीं झामुमो के केंद्रीय महासचिव मिथिलेश ठाकुर भी अपनी पार्टी के प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय रहे. वे देर रात तक शहर के विभिन्न वार्डों में सभाएं कर समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करते देखे गए. अन्य प्रत्याशी भी अपने दमखम के साथ मैदान में डटे रहे. दमखम के साथ मैदान में डटे हैं अलखनाथ पांडेय भाजपा के वरिष्ठ नेता सह पूर्व नगर उपाध्यक्ष अलखनाथ पांडेय पूरे दमखम से चुनाव मैदान में डटे हुए हैं. उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें समर्थन देगी, लेकिन समर्थन नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया. इस दौरान उन्हें पार्टी की ओर से नोटिस भी दिया गया, बावजूद इसके वे दोगुने उत्साह से प्रचार में जुटे रहे. अलखनाथ पांडेय ने भ्रष्टाचार मुक्त नगर परिषद को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है. अपने घोषणा पत्र में उन्होंने गरीब सब्जी विक्रेताओं को टैक्स फ्री करने, शहर में वाई-फाई जोन स्थापित करने सहित कई जनहितकारी वादे शामिल किये हैं. सेवा कार्यों के आधार पर आशीर्वाद मांग रहे विकास माली. कन्या विवाह एंड विकास सोसाइटी के सचिव सह युवा समाजसेवी विकास कुमार माली भी बिना किसी बड़े प्रचार अभियान के चुनाव मैदान में हैं. वे पिछले छह माह से नगर परिषद क्षेत्र के सभी 21 वार्डों में अपने निजी खर्च से कराए गए विकास कार्यों के आधार पर मतदाताओं से आशीर्वाद मांग रहे हैं. उनका दावा है कि उन्होंने सड़कों की मरम्मत, नालियों की सफाई और सैकड़ों वेपर लाइट लगवायी हैं. इसके अलावा वर्षों से उपेक्षित रामबाण तालाब की सफाई करायी. गरीब बेटियों के सामूहिक विवाह और जरूरतमंदों की सेवा को भी उन्होंने अपनी प्राथमिकता बताया है. बदलाव को मुद्दा बनाकर मैदान में दौलत सोनी समाजसेवी आशीष सोनी उर्फ दौलत सोनी पिछले पांच-छह वर्षों से नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं. उन्होंने युवाओं की टीम के साथ बदलाव और भ्रष्टाचार उन्मूलन को मुख्य मुद्दा बनाकर चुनाव में प्रवेश किया है. दौलत सोनी का कहना है कि जनता का आशीर्वाद मिलने पर वे भ्रष्टाचार समाप्त कर शहर की तस्वीर बदलने का कार्य करेंगे. उनका दावा है कि उन्हें सभी वर्गों का समर्थन मिल रहा है. भ्रष्टाचार पर दीपक शर्मा हमलावर आजसू के जिलाध्यक्ष दीपक शर्मा भी अध्यक्ष पद के प्रत्याशी हैं. उन्होंने पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बनाया है. नामांकन के बाद से वे लगातार पूर्व अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर हमलावर रहे हैं. उन्होंने नगर परिषद द्वारा किए गए दुकान आवंटन को भी मुद्दा बनाते हुए परिषद प्रबंधन और पूर्व पदाधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया है. दीपक शर्मा भ्रष्टाचार मुक्त नगर परिषद बनाने का वादा कर रहे हैं. भ्रष्टाचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने की बात कर रहे अनिल पांडेय भाजपा नेता सह पूर्व नगर उपाध्यक्ष अनिल पांडेय ने दावा किया है कि नगर परिषद में ड्रम सहित अन्य घोटालों का खुलासा उन्होंने ही किया था. वे पिछले पांच वर्षों से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहे हैं और दोषियों को न्यायालय तक पहुंचाया है. उन्होंने कहा कि वे इस चुनाव में भ्रष्टाचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने तथा सुंदर, स्वच्छ और विकसित गढ़वा के निर्माण के संकल्प के साथ मैदान में हैं. स्वच्छ और पारदर्शी शासन का वादा कर रहीं अनिता दत्त नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष अनिता दत्त ने कहा है कि जनता का आशीर्वाद मिलने पर वे स्वच्छ और पारदर्शी शासन बहाल करेंगी. उन्होंने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल को बेमिसाल और भ्रष्टाचार मुक्त बताया है. विकास के एजेंडे के साथ मैदान में मासूम खान झामुमो नेता मिथिलेश ठाकुर के प्रतिनिधि रहे मासूम खान भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हैं. उन्होंने विकास को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है. मासूम खान का कहना है कि नगर परिषद गठन के 18 वर्ष बीत जाने के बावजूद शहर का अपेक्षित विकास नहीं हो सका है. जनता का समर्थन मिलने पर वे विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करेंगे.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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