आशुतोष गुप्ता की रिपोर्ट
विशुनपुरा(गढ़वा ): आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बावजूद विशुनपुरा प्रखंड मुख्यालय से सटे अनुसूचित जाति मोहल्ले के लोगों को आज भी एक पक्की सड़क का इंतजार है. बारिश शुरू होते ही मोहल्ले की कच्ची सड़क पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाती है. हालात इतने बदतर हो गए हैं कि लोगों के लिए पैदल चलना भी दूभर हो गया है. दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है. बरसात के दिनों में इस मोहल्ले के लगभग 100 घरों की 600 आबादी की जिंदगी मानो घरों में ही कैद होकर रह जाती है.
नारकीय जीवन जीने को मजबूर
ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क श्री बंशीधर नगर-रमना वाया मझिआंव मुख्य सड़क पर स्थित झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक के समीप से निकलकर विशुनपुरा प्रखंड कार्यालय के पास पुनः मुख्य सड़क में मिलती है. मात्र दो किलोमीटर से भी कम लंबी इस सड़क का निर्माण वर्षों से लटका हुआ है, जिसके कारण पूरा मोहल्ला नारकीय जीवन जीने को मजबूर है.
बीमार को कंधे या चारपाई पर ले जाने की मजबूरी
ग्रामीणों के अनुसार सबसे गंभीर स्थिति आपात स्थिति में बनती है. यदि मोहल्ले में किसी की अचानक तबीयत खराब हो जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो एंबुलेंस मोहल्ले के भीतर तक नहीं पहुंच पाती. ऐसी स्थिति में मरीज को कंधे या चारपाई पर लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है.
फिसलकर गिरते हैं स्कूली बच्चे
मोहल्ले में दो आंगनबाड़ी केंद्र और एक नव प्राथमिक विद्यालय संचालित है. बदहाल सड़क का सबसे बुरा असर छोटे बच्चों पर पड़ रहा है. बारिश के दिनों में बच्चे कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं. कई बार बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं और उनके कपड़े-कापियां खराब हो जाती हैं, जिससे अभिभावकों में हर समय डर बना रहता है.
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चुनाव खत्म होते ही सड़क का मुद्दा ठंडे बस्ते में
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सड़क का मुद्दा ठंडे बस्ते में चला जाता है. प्रखंड कार्यालय के ठीक बगल में स्थित इस मोहल्ले की अनदेखी से ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है.
ग्रामीणों दे लिखित आवेदन
इस संबंध में पूछे जाने पर श्री बंशीधर नगर के अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर मिर्धा ने कहा कि यदि सड़क की ऐसी स्थिति है, तो ग्रामीणों द्वारा लिखित आवेदन दिए जाने के बाद वे मामले की पूरी रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त को भेजेंगे, ताकि जल्द से जल्द सड़क निर्माण की स्वीकृति मिल सके और ग्रामीणों की समस्या का समाधान हो.
