गढ़वा: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में आवाज मुखर होने लगी है. भवनाथपुर विधायक अनंत प्रताप देव ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विधेयक को झारखंड के लिए 'काला अध्यादेश' करार दिया.
राज्य के अधिकारों और वित्तीय हितों पर कुठाराघात का आरोप
विधायक अनंत प्रताप देव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने का अधिकार राज्य सरकारों को दिया है. इसी फैसले के आधार पर राज्य सरकार ने 'झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस अधिनियम 2024' पारित किया था, लेकिन केंद्र सरकार इस नए संशोधन विधेयक के जरिए राज्य के इस अधिकार को निष्प्रभावी करने का प्रयास कर रही है.
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि इस विधेयक से राज्य के वित्तीय हितों, खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास तथा स्थानीय एवं आदिवासी समुदायों के कल्याण पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ेगा. नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक इस विधेयक को वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
उपस्थिति
इस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुक्तेश्वर पाण्डेय, कमलेश मेहता, अजय प्रसाद, तस्लीम खान, श्यामसुन्दर गुप्ता, दीनानाथ बैठा, रजनीकान्त मधुर, मनोज पासवान, धीरज प्रसाद, बसंत प्रसाद, उपेन्द्र प्रसाद, मदन सिंह, संजय वर्मा, नागेन्द्र ठाकुर, हरीलाल राम, जवाहर सिंह, अजीत चंद्रवंशी और देवेंद्र सिंह उपस्थित थे.
