गढ़वा: सरकारी विद्यालयों में पीएम-पोषण योजना के तहत बच्चों को दिये जाने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है. उपायुक्त के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी रोहित कुमार ने चिनिया प्रखंड के नव प्राथमिक विद्यालय चीखौरापत्थर, उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय, उत्क्रमित उर्दू मध्य विद्यालय रानीचेरी तथा राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय चिरका का औचक निरीक्षण किया.
जांच के दौरान चीखौरापत्थर विद्यालय में सरसों तेल के स्थान पर वनस्पति तेल का उपयोग पाया गया. वहीं अन्य विद्यालयों में निर्धारित मेन्यू के अनुरूप भोजन नहीं परोसा जा रहा था. इस पर खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने संबंधित विद्यालय प्रबंधन को फटकार लगाते हुए निर्धारित मानकों और मेन्यू के अनुसार ही भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.
उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता मिलने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा यह जांच अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा.
भोजन में निम्न गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग करना अपराध
उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा ने सभी खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और एकलव्य विद्यालयों का नियमित एवं औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि बच्चों के भोजन में अपमिश्रित या निम्न गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और यह कानूनन दंडनीय अपराध है. उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच कर नियमित रिपोर्ट उपलब्ध कराने तथा केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है.
