यूरिया की कमी को लेकर जिले में 20 दिनों में 175 दुकानों की हुई जांच

यूरिया की कमी को लेकर जिले में 20 दिनों में 175 दुकानों की हुई जांच

पीयूष तिवारी, गढ़वा मिडिल ईस्ट में तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग बाधित होने के कारण रासायनिक खाद का आयात प्रभावित हुआ है. जिस कारण इस साल जिले में यूरिया और अन्य रासायनिक खाद की कमी होने की संभावना है. इसको लेकर कृषि विभाग की ओर से खाद-बीज दुकानों में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है. 20 दिनों में जिले की 175 दुकानों में जांच की जा चुकी है. खरीफ और भदई फसलों का मौसम लगभग एक महीने में शुरू होने वाला है और खाद की कमी के कारण यूरिया सहित अन्य रासायनिक खाद दुकानों से गायब होने लगी है. गरमा फसल और सब्जियों की खेती के लिए दुकानदार और कृषि विभाग के पदाधिकारी किसानों को दानेदार यूरिया के बजाय नैनो या नैनो प्लस लिक्विड यूरिया इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. पिछले साल भी हई थी यूरिया की कमी पिछले साल खरीफ मौसम 2025-26 में गढ़वा जिले में यूरिया की गंभीर किल्लत हुई थी. 45 किलो के यूरिया पैकेट को 267 रुपये में मिलने के बजाय कालाबाजारी में 1200 रुपये तक खरीदना पड़ा था. पिछले साल अप्रैल से सितंबर तक जिले को केवल 10,000 मीट्रिक टन (एक करोड़ किलो) यूरिया प्राप्त हुआ था. मिट्टी जांच में पता चला कि जिले के खेतों में कार्बन और नाइट्रोजन की कमी है. नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए यूरिया जरूरी है. प्रति हेक्टेयर कम से कम छह बोरा यूरिया जरूरी गढ़वा जिले की मुख्य फसल धान है, जो लगभग 55 हजार हेक्टेयर में लगायी जाती है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार प्रति हेक्टेयर में कम से कम छह बोरा (45 किलो का एक बोरा) यूरिया खाद की सामान्य आवश्यकता होती है. इस हिसाब से केवल धान के लिए जिले को 3.30 लाख बोरा (1.48 करोड़ किलो) यूरिया की जरूरत है. मकई, सब्जी और अन्य फसलों के लिए अलग से यूरिया की आवश्यकता होती है. कृषि विभाग ने रासायनिक खाद के लिए भेजा डिमांड अप्रैल से सितंबर तक के लिए विभाग ने रासायनिक खाद का डिमांड भेजा है. इसके अनुसार यूरिया 11,400 मीट्रिक टन, डीएपी 3,300 मीट्रिक टन, एमओपी 250 मीट्रिक टन, एनपीके (एस) 3,900 मीट्रिक टन, 20-20-20-13-(नाइट्रोजन 20%, फास्फोरस 20%, और सल्फर 13%) 2280 मीट्रिक टन, 10-26-26 (10% नाइट्रोजन, 26% फास्फोरस और 26% पोटाश) 810 मीट्रिक टन, 14-28-0-13 ( 14% नाइट्रोजन, 28% फॉस्फोरस, 13% सल्फर) 810 मीट्रिक टन की डिमांज की गयी है. गड़बड़ी मिलने पर की जा रही कार्रवाईः डीएओ जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) खुशबू पासवान ने कहा कि खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए विभाग और उपायुक्त की ओर से लगातार छापेमारी का निर्देश है. अब तक 175 दुकानों के स्टॉक और आवंटन की जांच की गयी है. जहां गड़बड़ियां मिली हैं, वहां कार्रवाई की जा रही है. गढ़वा में नहीं होती जैविक खेती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों से अपील की है कि वे रासायनिक उर्वरकों का 50 फीसदी कम इस्तेमाल करें और वैकल्पिक खेती अपनाएं. लेकिन गढ़वा जिले में आधिकारिक रूप से जैविक खेती नहीं होती. कृषि विभाग के अनुसार जिले में किसी किसान या फर्म को जैविक खेती के लिए मान्यता नहीं मिली है और किसी ने इसके सत्यापन के लिए आवेदन भी नहीं किया है.

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By Akarsh aniket

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