चाकुलिया.
चाकुलिया प्रखंड परिसर स्थित राज्य खाद्य निगम गोदाम में शुक्रवार को मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) का चावल उठाने के लिए शिक्षकों की भीड़ उमड़ी. सैकड़ों स्कूलों के शिक्षक अपने-अपने वाहनों के साथ गोदाम पहुंचे. परिसर में दिन भर गहमागहमी का माहौल रहा. इस अव्यवस्था के कारण प्रखंड के कई स्कूलों में दिनभर पठन-पाठन का कार्य बाधित रहा.एकल शिक्षक वाले स्कूलों में पैदा हुआ संकट :
चाकुलिया प्रखंड के लगभग चार से पांच दर्जन सरकारी स्कूल वर्तमान में महज एक-एक शिक्षक के भरोसे (एकल-शिक्षक) चल रहे हैं. चावल उठाव के आदेश के कारण इन विद्यालयों के शिक्षकों को भी विवश होकर स्कूल छोड़ना पड़ा. वे स्कूली बच्चों को मध्याह्न भोजन माता समिति (रसोइयों) के हवाले कर गोदाम पहुंचे थे. इनमें कालापाथर पंचायत के रुगडीसोल प्राथमिक विद्यालय के एकमात्र शिक्षक परमेश्वर मांडी, सिमदी पंचायत के पानीजिया प्राथमिक विद्यालय के एकमात्र शिक्षक पिथो बास्के और रघुनाथपुर प्राथमिक विद्यालय के एकमात्र शिक्षक रामकृष्ण घोष समेत दर्जनों ऐसे शिक्षक शामिल थे, जिनके गोदाम आने से उनके स्कूलों में शैक्षणिक कार्य पूरी तरह ठप रहा.
गैर-शैक्षणिक कार्यों से प्रभावित हो रहा नौनिहालों का भविष्य
शिक्षकों ने कहा कि उन्हें शिक्षण कार्य के अलावा कई अन्य गैर-शैक्षणिक (गैर-आवासीय) कार्यों में उलझा दिया जाता है. कागजी प्रक्रियाओं, रिपोर्ट तैयार करने और राशन उठाव जैसे कामों के चक्कर में वे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, जिससे छात्रों का भविष्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.
शिक्षकों ने की डोर-स्टेप डिलीवरी की मांग
परेशान शिक्षकों ने सरकार और जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि जिस प्रकार सबर जनजाति के परिवारों को राशन की डोर-स्टेप डिलीवरी (घर तक अनाज पहुंचाना) की सुविधा दी जाती है, उसी तर्ज पर प्रखंड के सभी स्कूलों में भी मध्याह्न भोजन के अनाज की आपूर्ति सीधे विद्यालय स्तर तक की जानी चाहिए. शिक्षकों का कहना है कि यदि राशन सीधे स्कूल पहुंचेगा, तो उनका कीमती समय बचेगा और वे अपना पूरा ध्यान बच्चों के शिक्षण कार्य पर केंद्रित कर सकेंगे.
