Durga Puja: झारखंड के प्रसिद्ध शक्तिपीठ रंकिणी मंदिर में नवरात्रि में उमड़ता है भक्तों का सैलाब, इस रास्ते पहुंचते हैं लोग

पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा में स्थित मां रंकिणी मंदिर में नवरात्रि में एक अलग ही धूम और उत्साह देखने को मिलता है. दुर्गा पूजा के दौरान मां के दर्शन के लिए भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है.

Durga Puja,रंजन कुमार गुप्ता (जादूगोड़ा): नवरात्र में जादूगोड़ा के प्रसिद्ध रंकिणी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमडने लगी हैं. भक्ति भाव से भक्तों द्वारा मंदिर परिसर में भी कलश स्थापित करके पूजा अर्चना किया जा रहा हैं. रंकिणी मंदिर के पुजारियों द्वारा बताया गया कि कुछ भक्तों का कलश स्थापित कराया गया. यहां सुबह शाम आरती भजन कीर्तन और प्रसाद वितरण भी किया जा रहा है. पूजा के अवसर में मंदिर को भी भव्य रूप से सजाया गया है. मंदिर में नौ दिनों तक भक्तों की भीड़ उमड़ती है व भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया जाता हैं. इस अवसर पर मंदिर कमेटी द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी काफी चाक चौबंद व्यवस्था की जाती हैं. जिससे भक्तों को पूजा-अर्चना करने में परेशानी न हो.

दूसरे राज्यों से मां के दर्शन को आते भक्त

प्रसिद्ध रंकिणी मंदिर जादूगोड़ा, जमशेदपुर, घाटशिला, धालभुमगढ़ के अलावे पड़ोसी राज्य बिहार, उड़ीसा व बंगाल समेत अन्य जगहों से भी लोग यहां दर्शन करने आते हैं. यहां लोग श्रद्धापूर्वक मां रंकिणी की पूजा-अर्चना करते हैं. यहां आने के लिए सड़क मार्ग का रास्ता सुगम है. जादूगोड़ा मोड़ चौक से लगभग तीन किलोमीटर तथा हाता चौक से लगभग 19 किलोमीटर व जमशेदपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 27 किलोमीटर की दूरी पर प्रसिद्ध रंकिणी मंदिर स्थित है.

रंकिणी मंदिर का इतिहास

हाता-जादूगोड़ा मुख्य मार्ग पर तिलाइटांड व रोहनीबेड़ा गांव के बीच कापड़गादी घाट पर मुख्य मार्ग के किनारे स्थित मां रंकिणी के दरबार में 1951 से स्व. दीनबंधु सिंह ने पूजा शुरू की थी. इसके बाद उनके पुत्रों ने 1962 में मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कराया, जो 1970 में पूरा हो गया. इसके बाद 1982 में राधा-कृष्ण मंदिर, 1985 में गणेश मंदिर, तो 2007 में भोले बाबा यानी टुइला बाबा के मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया गया, जो 2009 में पूरा हुआ. मंदिर के आस-पास का क्षेत्र पहाड़ो व घने वृक्षों से घिरा है. यहां का मनोरम दृश्य देखते ही बनता है. मां रंकिणी मंदिर के पास स्थित धरातल से लगभग 400 फीट की उंचाई पर बजरंगबली की मंदिर भी हैं.  

पूजा ही नहीं पहाड़ के वादियों घुमने पहुंचते हैं श्रद्धालु

यहां पहाड़ के वादियों में पक्षियों की चह चहहाहट, झरने की पानी की कल-कल हाहट श्रद्धालु को आकर्षित करते है. मंदिर के चोटी में बजरंगबली की प्रतिमा स्थापित की गई हैं. जहां श्रद्धालुओ द्वारा पहाड़ के रास्ते से गुजरते हुए बजरंगबली की प्रतिमा तक पहुंचते है, तथा विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं. श्रद्धालुओ के लिए वर्तमान में रंकिणी मंदिर की देख-रेख व संचालन के लिए दो कमेटी (मां रंकिणी मंदिर चैरेटेवल ट्रस्ट तथा मां रंकिणी कापड़गादी घाट विकास समिति) द्वारा विधि व्यवस्था का पूरा ख्याल रखा जाता हैं तथा प्रशासन की ओर से पोटका पूलिस तैनात रहती हैं.

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लेखक के बारे में

By Kunal kishore

कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.
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