दुमका : ग्राम प्रधान मांझी संगठन की ओर से शुक्रवार को धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया और राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया. इस कार्यक्रम के जरिये संगठन ने संताल परगना की पारंपरिक ग्राम प्रधान व्यवस्था को मजबूत करने, ग्रामसभा को अधिकार देने तथा क्षेत्र के लिए विशेष स्थानीयता व नियोजन नीति लागू करने की मांग की. संगठन की ओर से कहा गया कि झारखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी संताल परगना आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक रूप से अपेक्षित विकास से वंचित है.
संताल परगना में पेसा एक्ट लागू करने और ग्रामसभा को अधिकार देने की मांग
मांगपत्र में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 यानी पेसा एक्ट को प्रभावी तरीके से संताल परगना में अविलंब लागू करने की मांग प्रमुख रूप से की गयी है. संगठन ने कहा कि ग्रामसभा को लघु वन उपज और वन उत्पाद पर अधिकार मिलना चाहिए. साथ ही ग्रामसभा को विकास योजनाओं के लिए समुचित राशि उपलब्ध कराने और योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिकार देने की मांग की गयी है. ग्राम प्रधानों ने संताल परगना स्तर पर ग्राम प्रधान परिषद का गठन करने की मांग भी उठायी, ताकि पारंपरिक प्रधानी व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाया जा सके.
मालगुजारी वसूली और जमीन के अभिलेख दुरुस्त करने की मांग
इसके अलावा संताल परगना काश्तकारी अधिनियम, 1949 के प्रावधानों के तहत मालगुजारी की वसूली पूर्व की तरह ग्राम प्रधानों के माध्यम से ऑफलाइन कराने, वर्तमान सर्वे सेटलमेंट के अंतिम प्रकाशन के पर्चे में साविक जमाबंदी नंबर, साविक रकबा और साविक लगान दर्ज करने तथा प्रधानी जोत जमीन में गेंजर सेटलमेंट की तर्ज पर वर्तमान ग्राम प्रधान का नाम दर्ज करने, बंदोबस्त से जुड़े मामलों और अभिलेखों की जांच कराने की भी मांग की.
ग्राम प्रधानों का मानदेय बढ़ाने समेत बीमा, सिंचाई और 1932 आधारित नियोजन नीति की मांग
इसके अलावा ग्राम प्रधानों की सम्मानित राशि बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह करने तथा लेखाहोड़ यानी मांझी, जोग मांझी, पराणिक, नायकी, कुड़ाम नायकी और गुड़ैत की सम्मानित राशि पांच हजार रुपये प्रतिमाह करने, अगस्त 2024 से बढ़ी सम्मानित राशि का भुगतान करने तथा छूटे हुए लेखाहोड़ों को भी राशि देने, ग्राम प्रधानों एवं लेखाहोड़ों के लिए सरकार की ओर से 10-10 लाख रुपये का जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा कराने, संताल परगना में हर खेत को पानी उपलब्ध कराने के लिए गंगा नदी से पाइपलाइन के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था करने, संताल परगना के लिए 1932 के खतियान आधारित स्थानीयता एवं नियोजन नीति लागू करने तथा झारखंड सरकार की वर्तमान 60-40 नियोजन नीति को अविलंब रद्द करने की मांग दोहरायी.
स्थानीय युवाओं के हित में अलग नीति की मांग, ग्राम प्रधान संगठन ने जतायी एकजुटता
ग्राम प्रधान मांझी संगठन के प्रमंडलीय संयोजक भीम प्रसाद मंडल ने कहा कि क्षेत्र की विशिष्ट सामाजिक और पारंपरिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थानीय युवाओं के हित में अलग नीति जरूरी है. धरना में मनोज मांझी, शिवधन हेंब्रम, दुलूचांद हेंब्रम, महेंद्र राय, उचित मरीक, गायना बास्की, लाेधवा किस्कू, भीम सोरेन, श्रीपति मंडल, नेपाल राउत, सुशील हांसदा, चरण मुर्मू आदि मौजूद थे.
