गोपीकांदर : कोल कंपनी नवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड के खिलाफ गोपीकांदर प्रखंड की ओड़मो पंचायत के प्रभावित गांवों के रैयतों ने शुक्रवार को आदिवासी-मूलवासी प्रभावित संघर्ष समिति के बैनर तले तीन सूत्री मांग पत्र अंचल अधिकारी को सौंपा. मांग पत्र अंचल कार्यालय के नजीर श्रीकांत दास के हाथों सौंपा गया. समिति के सदस्यों ने कहा कि नियमानुसार खनन कार्य शुरू करने से पहले प्रभावित क्षेत्र के सभी ग्रामीणों के साथ वास्तविक जनसुनवाई होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.
खानापूर्ति की जनसुनवाई का आरोप, मुआवजा-रोजगार पर सवाल
आरोप लगाया कि कंपनी की ओर से प्रभावित ग्रामीणों की सहमति के बिना तथा वास्तविक प्रभावित क्षेत्रों में जनसुनवाई किए बिना किसी अन्य दूरस्थ गांव में खानापूर्ति के लिए जनसुनवाई कर खनन कार्य शुरू किया जा रहा है. रैयतों ने कहा कि ओड़मो पंचायत के प्रस्तावित खनन क्षेत्र के ग्रामीण खनन कार्य से सीधे प्रभावित हो रहे हैं. इससे पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि, पेयजल और जमीन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है. इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्र के लोगों को मिलने वाले उचित मुआवजा, रोजगार, विस्थापन नीति तथा अन्य सामाजिक लाभों की जानकारी कंपनी की ओर से स्पष्ट रूप से नहीं दी गयी है.
मुआवजा, रोजगार और विस्थापन नीति की मांग, पहल नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
सीएसआर के तहत मिलने वाले लाभों को लेकर भी पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है. समिति ने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक जनसुनवाई करायी जाये, प्रभावित रैयतों को मुआवजा, रोजगार और विस्थापन से संबंधित स्पष्ट नीति एवं जानकारी उपलब्ध करायी जाये तथा पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि, पेयजल और भूमि पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाये. रैयतों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र पहल नहीं की गयी, तो समिति के सदस्य आंदोलन करने को बाध्य होंगे. मांग पत्र सौंपने के दौरान राजदीप मुर्मू, सामेल मुर्मू, राजकुमार हांसदा, सुकूल मरांडी, लखीराम राय, देवान मरांडी, नरेश किस्कू, ढेबो बास्की, परगना सोरेन, विनोद सोरेन सहित बड़ी संख्या में प्रभावित रैयत मौजूद थे.
