दुमका को जल्द मिलेगा तारामंडल का तोहफा, जापानी टेक्निशियन तेजी से कर रहे काम

Dumka Planetarium Project: दुमका में झारखंड का अत्याधुनिक और बड़ा तारामंडल जल्द तैयार होने वाला है. जापान के विशेषज्ञ तकनीशियन प्रोजेक्टर और आधुनिक उपकरण लगाने में जुटे हैं. 150 लोगों की क्षमता वाला यह डिजिटल हाइब्रिड प्लैनेटेरियम छात्रों के लिए खगोल और अंतरिक्ष विज्ञान सीखने का नया केंद्र बनेगा. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

दुमका से आनंद जायसवाल की रिपोर्ट

Dumka Planetarium Project: झारखंड की उपराजधानी दुमका के लोगों को जल्द ही अत्याधुनिक और राज्य का सबसे बेहतर तारामंडल (प्लैनेटेरियम) की सौगात मिलने वाली है. इसके लिए जापान से तकनीशियनों की टीम पहुंची हुई है. दरअसल इसमें लगाये जा रहे उपकरण जापान की प्रतिष्ठित कंपनी आरएसए कोसमोस के जरिये कोनिका-मिनोल्टा लगा रही है. इन्हीं कंपनी की ओर से जापान के दो एक्सपर्ट यहां ताकेदा एव उमेदा पिछले एक पखवारे से कैम्प किये हुए हैं. कुछ और टेक्निशियन भी पहुंचनेवाले हैं.

जेसीएसटी करा रही तारामंडल का निर्माण

झारखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (जेसीएसटी) की ओर से दुमका के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में इसका निर्माण कराया जा रहा है. चार साल पहले भवन निर्माण का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका था और उपकरणों के इंस्टॉल होते ही इसके आंतरिक साज-सज्जा व गैलरी निर्माण का काम होना है. जिला के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा का कहना है कि इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए संबंधित विभागों से लगातार समन्वय किया जा रहा है. बहुत तेजी से प्रोजेक्टर सहित अन्य उपकरण लगाये जा रहे हैं, ताकि दुमका के लोगों को शीघ्र ही इस सुविधा का लाभ मिल सके.

11 साल बीत चुके हैं इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुए

इस अति महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर समय-समय पर सरकारी उदासीनता भी दिखी. यही वह रही कि इसके निर्माण में काफी अधिक वक्त लग गया. इस परियोजना में कितना देर हुआ और कितनी शिथिलता दिखी, इसका अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वर्ष 2015 में इस परियोजना के लिए करार किया गया था. प्रारंभिक योजना के अनुसार इसका निर्माण मार्च 2020 तक पूरा होना था, लेकिन विभिन्न कारणों से निर्माण कार्य में देरी हो गयी. अब इसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है. बता दें कि इस परियोजना का कार्य प्रतिष्ठित एजेंसी क्रिएटिव म्यूजियम डिजाइनर (सीएमडी) को दिया गया है. इस प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए जापानी टीम के साथ सत्यजीत गांगुली, देवाशीष दासगुप्ता, अगर पॉल एवं रूद्र प्रसाद चक्रवर्ती भी लगातार कैम्प किये हुए है.

क्या है इसकी खासियत?

दुमका में बनने वाले इस तारामंडल को पूरी तरह डिजिटल तकनीक से लैस किया जा रहा है. इसका गुंबद लगभग 15 मीटर का होगा, जिसके भीतर एक साथ करीब 150 लोग बैठकर अंतरिक्ष और खगोलीय घटनाओं से जुड़े नजारे को देख सकेंगे. आधुनिक ऑप्टोमेक्निकल प्रोजेक्टर प्रणाली के माध्यम से ग्रह-नक्षत्रों और ब्रह्मांड से संबंधित दृश्य प्रस्तुत किए जाएंगे. यहां बन रहा तारामंडल हाइब्रिड होगा. रांची में बने तारामंडल में पांच प्रोजेक्टर लगे हुए हैं, जबकि यहां छह प्रोजेक्टर लगाये गये हैं. इसके अलावा यहां खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ा एक एक्टिविटी एरिया भी बनाया जाएगा, जहां छात्र विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों के माध्यम से अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. तारामंडल परिसर में जीपीएस सक्षम टेलीस्कोप भी लगाया जाएगा, जिसकी मदद से लोग आकाशीय पिंडों और तारों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर सकेंगे.

छात्रों के लिए बनेगा ज्ञान का नया केंद्र

तारामंडल बनने के बाद दुमका और संताल परगना क्षेत्र के विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी प्राप्त करने का नया अवसर मिलेगा. छात्र पुस्तकों के अलावा प्रत्यक्ष दृश्य और वैज्ञानिक मॉडल के माध्यम से अंतरिक्ष से जुड़ी चीजों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे. स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों का कहना है कि लंबे समय से इसका निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए इसे जल्द पूरा कर आम लोगों के लिए खोलना चाहिए. इसके शुरू होने से दुमका में विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और यह शहर के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकता है.

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दुमका के बाद देवघर में भी बनेगा तारामंडल

पड़ोसी जिला देवघर में भी तारामंडल चालू होना है. देवघर का प्रोजेक्ट 8.48 करोड़ रुपये का ही था. इसे भी 31 मार्च 2020 को ही पूर्ण किया जाना था, लेकिन इसका भी काम धीमा ही चल रहा है. इसका गुंबद 8 मीटर का है. यहां 40-45 लोग बैठ पायेंगे. यह डिजिटल मॉड का होगा. दुमका की तरह हाइब्रिड नहीं. माना जा रहा है कि दुमका का प्रोजेक्ट पूरा होते ही सीएमडी देवघर के प्रोजेक्ट को पूरा करायेगी.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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