बंगाल चुनाव : शीतलकुची के जख्म अब भी हरे, 5 साल बाद भी इंसाफ की आस में रो रहे परिवार

Sitalkuchi Firing: बंगाल चुनाव 2026 के बीच शीतलकुची गोलीकांड की यादें ताजा हो गयीं हैं. 2021 में 5 लोगों की मौत हुई थी. उनके परिवार को आज भी इंसाफ का इंतजार है.

Sitalkuchi Firing: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की गहमागहमी के बीच कूचबिहार का शीतलकुची इलाका एक बार फिर चर्चा में है. चर्चा किसी नयी विकास योजना की नहीं, बल्कि उस ‘खूनी जख्म’ की है, जो 10 अप्रैल 2021 को लगा था. 5 साल बीत चुके हैं. 5 जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं, लेकिन उन परिवारों की आंखों का पानी आज भी नहीं सूखा, जिन्होंने अपनों को खोया था.

हंसते-खेलते परिवारों के जीवन में छा गया अंधेरा

मतदान के दिन हुई उस फायरिंग ने न केवल बंगाल की राजनीति को बदल दिया, बल्कि कई हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए अंधेरे में धकेल दिया. आज भी शीतलकुची के लोग न्याय के इंतजार में अदालत और प्रशासन की ओर टकटकी लगाये बैठे हैं.

2021 में क्या हुआ था शीतलकुची में?

विधानसभा चुनाव 2021 के चौथे चरण के दौरान शीतलकुची के जोरपाकरी स्थित बूथ नंबर 126 पर जो हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया था. केंद्रीय सुरक्षा बलों (CISF) की फायरिंग में 4 स्थानीय लोगों (हामिदुल मिया, सामीउल हक, मणिरुज्जमां और नूर आलम) की मौत हो गयी थी. उसी दिन सुबह एक अन्य हिंसक झड़प में पहली बार वोट देने आये आनंद बर्मन की भी हत्या कर दी गयी थी. तब से शीतलकुची की पहचान ‘राजनीतिक हिंसा के केंद्र’ के रूप में होने लगी.

बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Sitalkuchi Firing: 5 साल, 5 जिंदगियां और अनगिनत सवाल

मृतकों के परिजनों का कहना है कि हर चुनाव में नेता आते हैं, वादे करते हैं और चले जाते हैं, लेकिन असलियत नहीं बदलती.

  • इंसाफ की धीमी रफ्तार : मामले की जांच सीआईडी (CID) को सौंपी गयी थी, लेकिन 5 साल बाद भी जांच एजेंसी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. परिवारों का आरोप है कि उन्हें केवल ‘पॉलिटिकल मोहरा’ बनाकर छोड़ दिया गया.
  • आर्थिक तंगी और अकेलेपन की मार : जिन परिवारों के कमाऊ सदस्य चले गये, वे आज दाने-दाने को मोहताज हैं. सरकारी मदद के दावों के बीच कई परिवारों ने कहा कि अपनों की कमी कोई मुआवजा पूरा नहीं कर सकता.
  • आनंद बर्मन का परिवार : राजबंशी समुदाय से आने वाले आनंद बर्मन के परिवार का दर्द भी उतना ही गहरा है. उनके पिता आज भी अपने बेटे की तस्वीर लेकर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं.

इसे भी पढ़ें : ममता दीदी, कभी मां दुर्गा और श्रीराम का नाम लेना भी सीखिए, 4 मई TMC का आखिरी दिन : हिमंता बिस्व सरमा

2026 चुनाव : क्या फिर से दिखेगा वही खौफ?

शीतलकुची के निवासी इस बार भी डरे हुए हैं. प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के मन से सुरक्षा बलों के प्रति अविश्वास पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. निर्वाचन आयोग ने इस बार शीतलकुची में माइक्रो ऑब्जर्वर्स और ड्रोन की तैनाती की है, ताकि 2021 जैसी घटना दोबारा न हो. कुछ ग्रामीण न्याय न मिलने के विरोध में मतदान के बहिष्कार की बात कर रहे हैं. प्रशासन उन्हें समझाने में जुटा है.

इसे भी पढ़ें : बंगाल : पहले चरण में 152 सीटों पर ‘महामुकाबला’, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

शीतलकुची केवल एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह बंगाल की चुनावी हिंसा का वह प्रतीक है, जिसे समय भी नहीं भर सका. जब तक न्याय की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, ये जख्म हर चुनाव में हरे होते रहेंगे.

इसे भी पढ़ें

उत्तर बंगाल में ‘वर्ग संघर्ष’ की जगह अब ‘पहचान’ की लड़ाई, चाय बागानों से पहाड़ों तक कैसे बदली सियासत? समझें पूरा समीकरण

Yogi Adityanath: बंगाल की धरती काबा की नहीं, मां काली की रहेगी, ममता के गढ़ में योगी की ललकार

बंगाल चुनाव में दीवारों पर छिड़ी जंग, कहीं तीखा तंज तो कहीं मजेदार मीम्स, कोलकाता की गलियों में क्रिएटिविटी का जलवा

उत्तर बंगाल का ‘किंगमेकर’ कौन? 40 सीटों पर राजबंशी वोटों के लिए TMC और BJP में आर-पार की जंग

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >