पर्व . इलाके में धूमधाम से मनाया गया करमा पर्व
बासुकिनाथ : भाद्र मास शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि सोमवार को लोक संस्कृति व पारंपरिक आस्था का पर्व करमा पूजा जरमुंडी प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में धूमधाम से मनाया गया. करमा पर्व को भाई बहन का त्योहार भी कहा जाता है. बहनों ने निष्ठा भाव के साथ अपने भाइयों के लिए प्रार्थना की. करमा पूजा प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता, आस्था और उत्साह को अभिव्यक्त करता है. करमा के इस प्रकृति पर्व से जूड़ी लोक कथाओं में अच्छे कर्म करने का संदेश निहित है. करम का पेड़ परोपकार और कर्म की प्रेरणा देकर मानव जीवन को एक नई खुशी प्रदान करता है.
वैसे तो हमारी संस्कृति में वृक्ष की पूजा वैदिक काल से ही होते रही है. रात को आंगन में करम वृक्ष के डार रोप कर बहनें जो गीत गायी उनमें भाषा के मिठास व भाई-बहन के निर्मल प्रेम का स्पंदन भी उभरा. ग्रामीण इलाकों में महिलाएं जागरण करके करमा भगवान के पारंपरिक गीत ‘देहो करम देवा देहो आशिष हे मोर भइया जीयतऽ लाखों बरिस है…’देलियो गे करमैती देलियो आशिष गे …’आदि गीतों पर खूब नाच-गान कर जागरण किया.
ग्रामीण इलाकों में महिलाएं एक जगह एकत्रित होकर करमा भगवान की पूजा-अर्चना किया. कुंवारी लड़कियां उपवास में रहकर खेत की मिट्टी से हाथी, घोड़ा व शिव-पार्वती की मूर्ति बनाकर करम पेड़ के डाल के नीचे स्थापित कर विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना किया. करम बृक्ष के डाली के नीचे करमा भगवान की पूजा-अर्चना कर अपने-अपने भाइयों के सलामती की दुवा मांगी. संताल समुदाय में भी इस पर्व को वृहद पैमाने पर मनाया गया.
