दलाही : मसलिया सहित आसपास के क्षेत्र में करमा पर्व काफी धूमधाम से मनाया जाता है. 12 सितंबर को पर्व मनाया जाएगा. पर्व के मद्देनजर इलाके के विभिन्न गांवों में जवा डाली के चारों ओर नृत्य व करम गीत गाने का अभ्यास करते देखा जा रहा है.भाई बहन के पवित्र रिश्ते का इस पर्व का झारखंड में एक विशेष महत्व है. आदिकाल से प्रकृतिपर्व करमा को धुमधाम से मनाते आ रहे है.
करमा पर्व भाई बहन के प्रेम का प्रतिक है.पर्व पर कुंवारी कन्याओ द्वारा मांदर नगाड़ा की थाप पर आकर्षक करम नृत्य प्रस्तुत किया जाता है.कहाँ कहाँ मनाया जाता है पर्व-यह पर्व तिलाबाद,गुलामीबथान, कलोड़िया, डुमरिया तेतरियाटांड़ बाक गुमरो,
पारबाद,बाराडंगाल, सिदपहाड़ी ,करमाटाँड़ ,छोटाचाँदना ,पड़रिया ,गोलबाजार, नयापाड़ा, कुसुमडीह, बदिया ,गुमरो, सिंगरोगादी ,बनकटी ,नवाडीह ,बस्कीडीह आदि गांवों में प्रतिवर्ष मनाया जाता है.क्या कहती है करमैती- नमिता कुमारी शिखा कुमारी बबिता कुमारी रेबड़ी कुमरी, सावित्री कुमारी खुशबु कुमारी, बेली कुमारी, सुलोचना कुमारी,रीता कुमारी, कौशल्या कुमारी, उषा कुमारी काजल कुमारी ,रुपा कुमारी आशा कुमारी ,सुनिता कुमारी निकिता कुमारी चुनू कुमारी बताती है कि करमा भाई बहन के अटुट प्रेम का पर्व है.यह प्रकृति के प्रेम को भी दर्शाता है.पर्व में करम का विशेष महत्व है. कहा कि भाई की दीर्घायु और समृद्धि के लिए पर्व मनाया जाता है.
